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वोटर ID की PDF कॉपी डाउनलोड करें (Download Voter's ID Card Online, Step by Step Process)

◆नए वोटर ID की PDF कॉपी डाउनलोड करें

◆पुराने वोटर के लिए सुविधा 1 फरवरी से होगी शुरू


वोटर ID कार्ड खोने या खराब हो जाने पर इसे दोबारा बनवाना बड़ा मुश्किल होता है। अब इलेक्शन कमीशन ने यह समस्या दूर कर दी है। आज से वोटर ID को डाउनलोड किया जा सकेगा। 31 जनवरी तक सिर्फ वे वोटर्स अपनी वोटर ID डिजिटल फॉर्मेट में ले पाएंगे, जिन्होंने पिछले साल नवंबर-दिसंबर में अप्लाई किया है। एक फरवरी से सभी वोटर्स को यह सुविधा मिलने लगेगी।

नेशनल वोटर्स डे पर इलेक्शन कमीशन ने e-EPIC स्कीम शुरू की है। EPIC यानी इलेक्टोरल फोटो आइडेेंटिटी कार्ड। इसके जरिए आप अपने वोटर ID को अपने मोबाइल में डाउनलोड कर पाएंगे। इसका प्रिंट भी लिया जा सकेगा। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सोमवार को इसकी शुरुआत की। इस दौरान पांच नए वोटर्स को ई-वोटर कार्ड दिए गए।

वोटर ID मिलने का इंतजार खत्म

यह सुविधा शुरू होने के बाद वोटर ID का इंतजार नहीं करना होगा। वोटर लिस्ट में नाम शामिल होते ही इसे डाउनलोड किया जा सकेगा। वोटर इस कार्ड को प्रिंट कर सकते हैं, इसे लैमिनेट कर सकते हैं या इसे सहूलियत के हिसाब से डिजिटली स्टोर कर सकते हैं।

डिजिटल कार्ड के फायदे

  • e-EPIC नए वोटर्स को जारी किए जा रहे प्लास्टिक वोटर कार्ड से अलग होगा। इसे डिजीलॉकर में भी अपलोड किया जा सकता है।
  • e-EPIC डाउनलोड करने से पहले KYC कराना होगा। यह सुविधा मिलने के बाद वोटर को एड्रेस चेंज होने पर बार-बार नया कार्ड बनवाने की जरूरत नहीं रहेगी। इसके लिए सिंगल e-EPIC काफी होगा। QR कोड में बदले पते के साथ इसे नए सिरे से डाउनलोड किया जा सकता है।
  • जिन वोटर्स का वोटर ID कार्ड खो गया है या खराब हो गया है, वे फ्री में डुप्लीकेट कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे। अभी इसके लिए 25 रुपए देने होते हैं।
  • इस कदम से वन नेशन - वन इलेक्शन कार्ड की योजना पर आगे बढ़ा जा सकेगा।

आप कैसे E-EPIC डाउनलोड कर सकेंगे?

  • सबसे पहले आपको e-EPIC डाउनलोड करने के लिए वोटर पोर्टल, वोटर हेल्पलाइन मोबाइल ऐप या नेशनल वोटर सर्विस पोर्टल की साइट पर जाना होगा।
  • वोटर पोर्टल की वेबसाइट http://voterportal.eci.gov.in/ और NVSP की साइट https://nvsp.in/ है। इसके अलावा आप गूगल प्ले स्टोर से वोटर मोबाइल एप भी डाउनलोड कर सकते हैं।
  • अगर e-EPIC डाउनलोड करना चाहते हैं, लेकिन e-EPIC नंबर खो गया है तो आप इलेक्ट्रोरल रोल फॉर्म को http://voterportal.eci.gov.in/ या http://electoralsearch.in/ पर सर्च करें। यहां से आप अपना e-EPIC नंबर पा सकते हैं।

e-EPIC डाउनलोड करने के लिए इन स्टेप्स को फॉलो करना होगा

  1. e-EPIC डाउनलोड करने के लिए आपको http://voterportal.eci.gov.in/ or https://nvsp.in/ या वोटर हेल्पलाइन ऐप पर जाना होगा।
  2. वोटर पोर्टल पर खुद को रजिस्टर या लॉगिन करें।
  3. इसके बाद मेन्यू पर जाकर डाउनलोड e-EPIC पर क्लिक करें।
  4. EPIC नंबर या फॉर्म रैफरेंस नंबर डालें।
  5. OTP से नंबर वैरिफाई करें।
  6. डाउनलोड EPIC पर क्लिक करें।
  7. अगर मोबाइल नंबर कार्ड पर दूसरा है, तो KYC की प्रोसेस पूरा करें।
  8. इसमें फेस लाइवनेस वैरिफिकेशन भी कर सकते हैं।
  9. KYC की मदद से नया नंबर अपडेट कर e-EPIC डाउनलोड किया जा सकेगा।

आज से वेब रेडियो, हैलो वोटर्स की भी शुरुआत
इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया के स्थापना दिवस पर 2011 से हर साल 25 जनवरी को नेशनल वोटर्स डे मनाया जाता है। आज होने वाले आयोजन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इलेक्शन कमीशन के वेब रेडियो, हैलो वोटर्स की शुरुआत की।

अत्यधिक प्रभावी लोगों की आदतें ( habits of highly effective people)


आपकी ज़िन्दगी बस यूँ ही नहीं घट जाती. चाहे आप जानते हों या नहीं , ये आपही के द्वारा डिजाईन की जाती है. आखिरकार आप ही अपने विकल्प चुनते हैं. आप खुशियाँ चुनते हैं . आप दुःख चुनते हैं.आप निश्चितता चुनते हैं. आप अपनी अनिश्चितता चुनते हैं.आप अपनी सफलता चुनते हैं. आप अपनी असफलता चुनते हैं.आप साहस चुनते हैं.आप डर चुनते हैं.इतना याद रखिये कि हर एक क्षण, हर एक परिस्थिति आपको एक नया विकल्प देती है.और ऐसे में आपके पास हमेशा ये opportunity होती है कि आप चीजों को अलग तेरीके से करें और अपने लिए और positive result produce करें. 


अत्यधिक प्रभावी लोगों की आदतें

Habit 1 : Be Proactive / प्रोएक्टिव बनिए

Proactive होने का मतलब है कि अपनी life के लिए खुद ज़िम्मेदार बनना. आप हर चीज केलिए अपने parents या grandparents को नही blame कर सकते .Proactive लोग इस बात को समझते हैं कि वो “response-able” हैं . वो अपने आचरण के लिए जेनेटिक्स , परिस्थितियों, या परिवेष को दोष नहीं देते हैं.उन्हें पता होताहै कि वो अपना व्यवहार खुद चुनते हैं. वहीँ दूसरी तरफ जो लोग reactive होते हैं वो ज्यादातर अपने भौतिक वातावरण से प्रभावितहोते हैं. वो अपनेbehaviour के लिए बाहरी चीजों को दोष देते हैं. अगर मौसम अच्छा है, तोउन्हें अच्छा लगता है.और अगर नहीं है तो यह उनकेattitude और performance को प्रभावित करता है, और वो मौसम को दोष देते हैं. सभी बाहरी ताकतें एक उत्तेजना की तरह काम करती हैं , जिन पर हम react करते हैं. इसी उत्तेजना और आप उसपर जो प्रतिक्रिया करते हैं के बीच में आपकी सबसे बड़ी ताकत छिपी होती है- और वो होती है इस बात कि स्वतंत्रता कि आप अपनी प्रतिक्रिया का चयन स्वयम कर सकते हैं.

एक बेहद महत्त्वपूर्ण चीज होती है कि आप इस बात का चुनाव कर सकते हैं कि आप क्या बोलते हैं.आप जो भाषा प्रयोग करते हैं वो इस बात को indicate करती है कि आप खुद को कैसे देखते हैं.एक proactive व्यक्ति proactive भाषा का प्रयोग करता है.–मैं कर सकता हूँ, मैं करूँगा, etc. एक reactive व्यक्ति reactive भाषा का प्रयोग करता है- मैं नहीं कर सकता, काश अगर ऐसा होता , etc. Reactive लोग सोचते हैं कि वो जो कहते और करते हैं उसके लिए वो खुद जिम्मेदार नहीं हैं-उनके पास कोई विकल्प नहीं है.

ऐसी परिस्थितियां जिन पर बिलकुल भी नहीं या थोड़ा-बहुत control किया जा सकता है , उसपर react या चिंता करने के बजाये proactive लोग अपना time और energy ऐसी चीजों में लगाते हैं जिनको वो control कर सकें. हमारे सामने जो भी समस्याएं,चुनतिया या अवसर होते हैं उन्हें हम दो क्षेत्रों में बाँट सकते हैं:

1)Circle of Concern ( चिंता का क्षेत्र )

2)Circle of Influence. (प्रभाव का क्षेत्र )

Proactive लोग अपना प्रयत्न Circle of Influence पर केन्द्रित करते हैं.वो ऐसी चीजों पर काम करते हैं जिनके बारे में वो कुछ कर सकते हैं: स्वास्थ्य , बच्चे , कार्य क्षेत्र कि समस्याएं.Reactive लोग अपना प्रयत्नCircle of Concern पर केन्द्रित करते हैं: देश पर ऋण , आतंकवाद, मौसम. इसबात कि जानकारी होना कि हम अपनी energy किन चीजों में खर्च करते हैं, Proactive बनने की दिशा में एक बड़ा कदम है


Habit 2: Begin with the End in Mind अंत को ध्यान में रख कर शुरुआत करें. 

तो, आप बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं? शायद यह सवाल थोड़ा अटपटा लगे,लेकिन आप इसके बारे में एक क्षण के लिए सोचिये. क्या आप अभी वो हैं जो आप बनना चाहते थे, जिसका सपना आपने देखा था, क्या आप वो कर रहे हैं जो आप हमेशा से करना चाहते थे. इमानदारी से सोचिये. कई बार ऐसा होता है कि लोग खुद को ऐसी जीत हांसिल करते हुए देखते हैं जो दरअसल खोखली होती हैं–ऐसी सफलता, जिसके बदले में उससे कहीं बड़ी चीजों को गवाना पड़ा. यदि आपकी सीढ़ी सही दीवारपर नहीं लगी है तो आप जो भी कदम उठाते हैं वो आपको गलत जगह पर लेकर जाता है.

Habit 2 आपके imagination या कल्पना पर आधारित है– imagination , यानि आपकी वो क्षमता जो आपको अपने दिमाग में उन चीजों को दिखा सके जो आप अभी अपनी आँखों से नहीं देख सकते. यह इस सिधांत पर आधारित है कि हर एक चीज का निर्माण दो बार होता है. पहला mental creation,और दूसरा physical creation. जिस तरह blue-print तैयार होने केबाद मकान बनता है , उसी प्रकार mental creation होने के बाद ही physical creation होती है.अगर आप खुद visualize नहीं करते हैं कि आप क्या हैं और क्या बनना चाहते हैं तो आप, आपकी life कैसी होगी इस बात का फैसला औरों पर और परिस्थितियों पर छोड़ देते हैं. Habit 2 इस बारे में है कि आप किस तरह से अपनी विशेषता को पहचानते हैं,और फिर अपनी personal, moral और ethical guidelines के अन्दर खुद को खुश रख सकते और पूर्ण कर सकते हैं.अंत को ध्यान में रख कर आरम्भ करने का अर्थ है, हर दिन ,काम या project की शुरआत एक clear vision के साथ करना कि हमारी क्या दिशा और क्या मंजिल होनी चाहिए, और फिर proactively उस काम को पूर्ण करने में लग जाना.

Habit 2 को practice मेंलाने का सबसे अच्छा तरीका है कि अपना खुद का एक Personal Mission Statement बनाना. इसका फोकस इस बात पर होगा कि आप क्या बनना चाहते हैं और क्या करना चाहते हैं.ये success के लिए की गयी आपकी planning है.ये इस बात की पुष्टिकरता है कि आप कौन हैं,आपके goals कोfocus में रखता है, और आपके ideas को इस दुनिया में लाता है. आपका Mission Statement आपको अपनी ज़िन्दगी का leader बनाता है. आप अपना भाग्य खुद बनाते हैं, और जो सपने आपने देखे हैं उन्हें साकार करते हैं. 


Habit 3 : Put First Things First प्राथमिक चीजों को वरीयता दें

एक balanced life जीने के लिए, आपको इस बात को समझना होगा कि आप इस ज़िन्दगीमें हर एक चीज नहीं कर सकते. खुद को अपनी क्षमता से अधिक कामो में व्यस्त करने की ज़रुरत नहीं है. जब ज़रूरी हो तो “ना” कहने में मत हिचकिये, और फिर अपनी important priorities पर focus कीजिये.
Habit 1 कहती है कि , ” आप in charge हैं . आप creator हैं”. Proactive होना आपकी अपनी choice है. Habit 2 पहले दिमाग में चीजों को visualize करने के बारे में है. अंत को ध्यान में रख कर शुरआत करना vision से सम्बंधित है. Habit 3 दूसरी creation , यानि physical creation के बारे में है. इस habit मेंHabit 1 और Habit 2 का समागम होता है. और यह हर समय हर क्षण होता है. यह Time Management सेrelated कई प्रश्नों को deal करता है.
लेकिन यह सिर्फ इतना ही नहीं है.Habit 3 life management के बारे में भी है—आपका purpose, values, roles ,और priorities. “प्राथमिक चीजें” क्या हैं? प्राथमिक चीजें वह हैं , जिसको आप व्यक्तिगत रूप से सबसे मूल्यवान मानते हों. यदि आप प्राथमिक कार्यों को तरजीह देने का मतलब है कि , आप अपना समय , अपनी उर्जा Habit 2 में अपने द्वारा set की गयीं priorities पर लगा रहे हैं. 


Habit 4: Think Win-Win हमेशा जीत के बारे में सोचें

Think Win-Win अच्छा होने के बारे में नहीं है, ना ही यह कोई short-cut है. यह character पर आधारित एक कोड है जो आपको बाकी लोगों से interact और सहयोग करने के लिए है.
हममे से ज्यादातर लोग अपना मुल्यांकन दूसरों सेcomparison और competition के आधार पर करते हैं. हम अपनी सफलता दूसरों की असफलता में देखते हैं—यानि अगर मैं जीता, तो तुम हारे, तुम जीते तो मैं हारा. इस तरह life एक zero-sum game बन जाती है. मानो एक ही रोटी हो, और अगर दूसरा बड़ा हिस्सा ले लेता है तो मुझे कम मिलेगा, और मेरी कोशिश होगी कि दूसरा अधिक ना पाए. हम सभी येgame खेलते हैं, लेकिन आप ही सोचिये कि इसमें कितना मज़ा है?

Win -Win ज़िन्दगी कोco-operation की तरह देखती है, competition कीतरह नहीं. Win-Win दिल और दिमाग की ऐसी स्थिति है जो हमेंलगातार सभी काहित सोचने के लिए प्रेरित करती है.Win-Win का अर्थ है ऐसे समझौते और समाधान जो सभी के लिए लाभप्रद और संतोषजनक हैं. इसमें सभी खाने को मिलती है, और वो काफी अच्छाtaste करती है.

एक व्यक्ति या संगठन जो Win-Win attitude के साथ समस्याओं को हल करने की कोशिश करता है उसके अन्दर तीन मुख्य बातें होती हैं:

Integrity / वफादारी :अपनेvalues, commitments औरfeelings के साथ समझौता ना करना.
Maturity / परिपक्वता : अपनेideas औरfeelings को साहस के साथ दूसरों के सामने रखना और दूसरों के विचारों और भावनाओं की भी कद्र करना.
Abundance Mentality / प्रचुरता की मानसिकता :इस बात में यकीन रखना की सभी के लिए बहुत कुछ है.

बहुत लोगeither/or केterms में सोचते हैं: या तो आप अच्छे हैं या आप सख्त हैं.Win-Win में दोनों की आवश्यकता होती है. यह साहस और सूझबूझ के बीचbalance करने जैसा है.Win-Win को अपनाने के लिए आपको सिर्फ सहानभूतिपूर्ण ही नहीं बल्कि आत्मविश्वाश से लबरेज़ भी होना होगा.आपको सिर्फ विचारशील और संवेदनशील ही नहीं बल्कि बहादुर भी होना होगा.ऐसा करनाकि -courage और consideration मेंbalance स्थापित हो, यहीreal maturity है, औरWin-Win के लिए बेहद ज़रूरी है. 


Habit 5: पहले दूसरों को समझो फिर अपनी बात समझाओ.

Communication लाइफ की सबसे ज़रूरी skill है. आप अपने कई साल पढना-लिखना और बोलना सीखने में लगा देते हैं. लेकिन सुनने का क्या है? आपको ऐसी कौनसी training मिली है, जो आपको दूसरों को सुनना सीखाती है,ताकि आप सामने वाले को सच-मुच अच्छे से समझ सकें? शायद कोई नहीं? क्यों?
अगर आप ज्यादातर लोगों की तरह हैं तो शायद आप भी पहले खुद आपनी बात समझाना चाहते होंगे. और ऐसा करने में आप दुसरे व्यक्तिको पूरी तरह ignore कर देते होंगे , ऐसा दिखाते होंगे कि आप सुन रहे हैं,पर दरअसल आप बस शब्दों को सुनते हैं परउनके असली मतलब को पूरी तरह से miss कर जाते हैं.
सोचिये ऐसा क्यों होता है? क्योंकि ज्यादातर लोग इस intention के साथ सुनते हैं कि उन्हें reply करना है, समझना नहीं है.आप अन्दर ही अन्दर खुद को सुनते हैं और तैयारी करते हैं कि आपको आगे क्या कहना है,क्या सवाल पूछने हैं, etc. आप जो कुछ भी सुनते हैं वो आपकेlife-experiences से छनकर आप तक पहुचता है.
आप जो सुनते हैं उसे अपनी आत्मकथा से तुलना कर देखते हैं कि ये सही है या गलत. और इस वजह से आप दुसरे की बात ख़तम होने से पहले ही अपने मन में एक धारणा बना लेते हैं कि अगला क्या कहना चाहता है. क्या ये वाक्य कुछ सुने-सुने से लगते है?

“अरे, मुझे पता है कि तुम कैसा feel कर रहे हो.मुझे भी ऐसा ही लगा था.” “मेरे साथ भी भी ऐसा ही हुआ था.” ” मैं तुम्हे बताता हूँ कि ऐसे वक़्तमें मैंने क्या किया था.”

चूँकि आप अपने जीवन के अनुभवों के हिसाब से ही दूसरों को सुनते हैं. आप इन चारों में से किसी एक तरीके से ज़वाब देते हैं:

Evaluating/ मूल्यांकन:पहले आप judge करते हैं उसके बाद सहमत या असहमत होते हैं.
Probing / जाँच :आप अपने हिसाब से सवाल-जवाब करते हैं.
Advising/ सलाह :आप सलाह देते हैं और उपाय सुझाते हैं.

Interpreting/ व्याख्या :आप दूसरों के मकसद और व्यवहार को अपने experience के हिसाब से analyze करते हैं.
शायदआप सोच रहे हों कि, अपने experience के हिसाब से किसी से relate करने में बुराई क्या है? कुछ situations में ऐसा करना उचित हो सकत है, जैसे कि जब कोई आपसे आपके अनुभवों के आधार पर कुछ बतानेके लिए कहे, जब आप दोनों के बीच एक trust की relationship हो. पर हमेशा ऐसा करना उचित नहीं है.


Habit 6: Synergize / ताल-मेल बैठाना

सरल शब्दों में समझें तो , “दो दिमाग एक से बेहतर हैं ” Synergize करने का अर्थ है रचनात्मक सहयोग देना. यह team-work है. यह खुले दिमाग से पुरानी समस्याओं के नए निदान ढूँढना है.
पर ये युहीं बस अपने आप ही नहीं हो जाता. यह एक process है , और उसी process से, लोग अपनेexperience और expertise को उपयोग में ला पाते हैं .अकेले की अपेक्षा वो एक साथ कहीं अच्छाresult दे पाते हैं. Synergy से हम एक साथ ऐसा बहुत कुछ खोज पाते हैं जो हमारे अकेले खोजने पर शायद ही कभी मिलता. ये वो idea है जिसमे the whole is greater than the sum of the parts. One plus one equals three, or six, or sixty–या उससे भी ज्यादा.
जब लोग आपस में इमानदारी से interact करने लगते हैं, और एक दुसरे से प्रभावित होने के लिए खुले होते हैं , तब उन्हें नयी जानकारीयाँ मिलना प्रारम्भ हो जाता है. आपस में मतभेद नए तरीकों के आविष्कार की क्षमता कई गुना बढ़ा देते हैं.

मतभेदों को महत्त्व देना synergy का मूल है. क्या आप सच-मुच लोगों के बीच जो mental, emotional, और psychological differences होते हैं, उन्हें महत्त्व देते हैं? या फिर आप ये चाहते हैं कि सभी लोग आपकी बात मान जायें ताकि आप आसानी से आगे बढ़ सकें? कई लोग एकरूपता को एकता समझ लेते हैं. आपसी मतभेदों को weakness नहीं strength के रूप में देखना चाहिए. वो हमारे जीवन में उत्साह भरते हैं. 

Habit 7: Sharpen the Saw कुल्हाड़ी को तेज करें

Sharpen the Saw का मतलब है अपने सबसे बड़ी सम्पत्ति यानि खुद को सुरक्षित रखना. इसका अर्थ है अपने लिए एक प्रोग्राम डिजाईन करना जो आपके जीवन के चार क्षेत्रों physical, social/emotional, mental, and spiritual में आपका नवीनीकरण करे. नीचे ऐसी कुछ activities केexample दिए गए हैं:

Physical / शारीरिक :अच्छा खाना, व्यायाम करना, आराम करना
Social/Emotional /:सामजिक/भावनात्मक :औरों के ससाथ सामाजिक और अर्थपूर्ण सम्बन्ध बनाना.
Mental / मानसिक :पढना-लिखना, सीखना , सीखना.
Spiritual / आध्यात्मिक :प्रकृति के साथ समय बीताना , ध्यान करना, सेवा करना.

आप जैसे -जैसे हर एक क्षेत्र में खुद को सुधारेंगे, आप अपने जीवन में प्रगति और बदलाव लायेंगे.Sharpen the Saw आपको fresh रखता है ताकि आप बाकी की six habits अच्छे से practice कर सकें. ऐसा करने से आप challenges face करने की अपनी क्षमता को बढ़ा लेते हैं. बिना ऐसा किये आपका शरीर कमजोर पड़ जाता है , मस्तिष्क बुद्धिरहित हो जाता है, भावनाए ठंडी पड़ जाती हैं,स्वाभाव असंवेदनशील हो जाता है,और इंसान स्वार्थी हो जाता है. और यह एक अच्छी तस्वीर नहीं है, क्यों?

आप अच्छा feel करें , ऐसा अपने आप नहीं होता. एक balanced life जीने काअर्थ है खुद कोrenew करने के लिए ज़रूरी वक़्त निकालना.ये सब आपके ऊपरहै .आप खुद को आराम करकेrenew कर सकते हैं. या हर काम अत्यधिक करके खुद को जला सकते हैं . आप खुद को mentallyऔर spiritually प्यार कर सकते हैं , या फिर अपने well-being से बेखबर यूँ ही अपनी ज़िन्दगी बिता सकते हैं.आप अपने अन्दर जीवंत उर्जा का अनुभव कर सकते हैं या फिर टाल-मटोल कर अच्छे स्वास्थ्य और व्यायाम के फायदों को खो सकते हैं.

आप खुद को पुनर्जीवित कर सकते हैं और एक नए दिन का स्वागत शांति और सद्भावके साथ कर सकते हैं.या फिर आप उदासी के साथ उठकर दिन को गुजरते देख सकतेहैं. बस इतना याद रखिये कि हर दिन आपको खुद को renew करने का एक नया अवसरदेता है, अवसर देता है खुद को recharge करने का. बस ज़रुरत है Desire (इच्छा),Knowledge( ज्ञान)और Skills(कौशल) की. 

रात 12 बजे मनाते हैं जन्मदिन तो हो जाएं सावधान !


रात 12 बजे मनाते हैं जन्मदिन तो हो जाएं सावधान, बुला रहे हैं दुर्भाग्य को
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   एक अजीब सी प्रथा इन दिनों चल पड़ी है वो है ..रात 12 बजे शुभकामनाएं देने और जन्मदिन मनाने की। लेकिन क्या आपको पता है भारतीय शास्त्र इसे गलत मानता है .. आज हम आपको यही  बताने जा रहे हैं कि वास्तव में ऐसा करने से कितना बड़ा अनिष्ट हो सकता है..

आजकल किसी का बर्थडे हो, शादी की सालगिरह हो या फिर कोई और अवसर क्यों ना हो, रात के बारह बजे केक काटना लेटेस्ट फैशन बन गया है। लोग इस बात को लेकर उत्साहित रहते हैं कि रात को बारह बजे केक काटना है या दोस्तों यारों का जन्मदिन रात के बारह बजे ही सेलिब्रेट करना है। लेकिन वास्तव में अंग्रेजी तिथि अनुसार बर्थडे या एनिवर्सरी मनाना किसी के लिए भी शुभ नहीं है। इसके पीछे कुछ ऐसे कारण है, जिनका सीधा संबंध हमारे शास्त्रों से हैं।

अक्सर ऐसा देखा जाता है कि लोग अपना जन्मदिन 12 बजे यानि निशीथ काल ( प्रेत काल) में मनाते हैं। । निशीथ काल रात्रि को वह समय है जो समान्यत: रात 12 बजे से रात 3 बजे की बीच होता है। आमजन इसे मध्यरात्रि या अर्ध रात्रि काल कहते हैं। शास्त्रनुसार यह समय अदृश्य शक्तियों, भूत व पिशाच का काल होता है। इस समय में यह शक्ति अत्यधिक रूप से प्रबल हो जाती हैं।

हम जहां रहते हैं वहां कई ऐसी शक्तियां होती हैं, जो हमें दिखाई नहीं देतीं किंतु बहुधा हम पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं जिससे हमारा जीवन अस्त-व्यस्त हो उठता है और हम दिशाहीन हो जाते हैं।
जन्मदिन की पार्टी में अक्सर मदिरा व मांस का चलन होता है।  ऐसे में प्रेतकाल में केक काटकर, मदिरा व मांस का सेवन करने से अदृश्य शक्तियां व्यक्ति की आयु व भाग्य में कमी करती हैं और दुर्भाग्य उसके द्वार पर दस्तक देता है। साल के कुछ दिनों को छोड़कर जैसे दीपावली, 4 नवरात्रि, जन्माष्टमी व शिवरात्रि पर निशीथ काल महानिशीथ काल बन कर शुभ प्रभाव देता है जबकि अन्य समय में दूषित प्रभाव देता है।

#शास्त्रों_के_अनुसार रात के समय दी गई शुभकामनाएं प्रतिकूल फल देती हैं

हिन्दू शास्त्रों के अनुसार दिन की शुरुआत सूर्योदय के साथ ही होती है और यही समय ऋषि-मुनियों के तप का भी होता है।
इसलिए इस कला में वातावरण शुद्ध और नकारात्मकता विहीन होता है। ऐसे में शास्त्रों के अनुसार सूर्योदय होने के बाद ही व्यक्ति को बर्थडे विश करना चाहिए
क्योंकि रात के समय वातावरण में रज और तम कणों की मात्रा अत्याधिक होती है और
उस समय दी गई बधाई या शुभकामनाएं फलदायी ना होकर प्रतिकूल बन जाती हैं।

अटल बिहारी वाजपेयी जीवनी | Atal Bihari Vajpayee biography in hindi


अटल बिहारी वाजपेयी जीवनी  
अटल जी का जन्म मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले में मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था!  अटल बिहारी वाजपेयी ने अपनी आखरी सांस AIIMS अस्पताल में 5:०5 PM पर ली (16th August 2018). 93 वर्षीय बहुमुखी प्रधान मंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने हमे १६ अगस्त 2018 को छोड़ दिया। अटल जी की मृत्यु पर 7 दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गयी ।
Atal Bihari Vajpayee biography in hindi बहु प्रतिभावान राजनैतिज्ञ अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीती में पिछले 50 सालों से सक्रीय है. अपने राजनैतिक सफ़र में वाजपेयी जी सबसे आदर्शवादी व प्रशंसनीय राजनेता थे. अटल जी जैसा नेता होना पुरे देश के लिए गर्व की बात है. उनके बहुत से कामों की वजह से देश आज इस मुकाम पर है. जवाहरलाल नेहरु के बाद अगर कोई 3 बार प्रधानमंत्री बना है तो वो अटल जी ही है. अटल जी पिछले 5 दशकों से संसद में सक्रीय रहे, साथ ही वे इकलोते राजनेता है जो 4 अलग अलग प्रदेश से सांसद चुने गए. अटल जी भारत की आजादी के पहले से राजनीती में आ गए थे, उन्होंने गाँधी जी के साथ भारत छोड़ो आन्दोलन में भी भाग लिया था, और कई बार जेल यातनाएं भी सही.
अटल की बहुमुखी प्रतिभा के धनि है, वे बहुत अच्छे कवी भी है, जो राजनीती पर भी अपनी कविता और व्यंग्य से सबको आश्चर्यचकित करते रहे है, उनकी बहुत ही रचनाएँ पब्लिश भी हुई है जिन्हें आज भी लोग पढ़ते है. अटल जी को अपनी मातृभाषा हिंदी से भी बेहद प्रेम है, अटल जी पहले राजनेता बने, जिन्होंने यू एन जनरल असेंबली में हिंदी में भाषण दिया था. अटल जी पहली बार सिर्फ 13 दिन के लिए प्रधानमंत्री बने थे. इसके 1 साल के बाद वे फिर प्रधानमंत्री बने लेकिन इस बार भी उनका ये सफ़र एक साल का रहा. तीसरी बार अटल जी जब प्रधानमंत्री बने तब उनका कार्यकाल पूरा 5 साल का रहा और ये सबसे अधिक सफल माना गया.

अटल बिहारी वाजपेयी जीवनी 


Atal Bihari Vajpayee biography in hindi







क्रमांक

जीवन परिचय बिंदु

अटल बिहारी जीवन परिचय


1.

पूरा नाम

अटल बिहारी वाजपेयी


2.

जन्म

25 दिसम्बर 1924


2.

मृत्यु

16 अगस्त 2018


3.

जन्म स्थान

ग्वालियर, मध्यप्रदेश


4.

माता-पिता

कृष्णा देवी, कृष्णा बिहारी वाजपेयी


5.

विवाह

नहीं हुआ


6.

राजनैतिक पार्टी

भारतीय जनता पार्टी


7.

अवार्ड

1992 – पद्म विभूषण
1994 – लोकमान्य तिलक अवार्ड
1994 – बेस्ट सांसद अवार्ड
1994 – पंडित गोविन्द वल्लभ पन्त अवार्ड
2014 – भारत रत्न




अटल बिहारी वाजपेयी बचपन व आरंभिक जीवन (Atal Bihari Vajpayee Personal Life)–
अटल जी का जन्म मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले में मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था. अटल जी के 7 भाई बहन थे. उनके पिता कृष्णा बिहारी स्कूल टीचर व कवी थे. स्वरास्ती स्कूल से स्कूलिंग करने के बाद अटल जी ने लक्ष्मीबाई कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरा किया, इसके बाद उन्होंने कानपूर के DAVV कॉलेज से इकोनोमिक्स में पोस्ट ग्रेजुएशन किया. उन्होंने लखनऊ के लॉ कॉलेज में आगे पढ़ने के लिए आवेदन भी दिया, लेकिन फिर उनका पढाई में मन नहीं लगा और वे आरएसएस द्वारा पब्लिश मैगजीन में एडिटर का काम करने लगे. अटल जी को एक बहुत अच्छे पत्रकार, राजनेता व कवी के रूप में जाना जाता है. अटल जी ने कभी शादी नहीं की, लेकिन उन्होंने B N कॉल की 2 बेटियां नमिता और नंदिता को गोद लिया था. अटल जी सच्चे देश भक्त रहे, पढाई करते समय भी वे आजादी की लड़ाई में बड़े बड़े नेताओं के साथ खड़े रहे. वे उस समय बहुत से हिंदी न्यूज़ पेपर के एडिटर भी रहे.
अटल बिहारी वाजपेयी राजनैतिक सफ़र (Atal Bihari Vajpayee Political Life)–
अटल जी का राजनैतिक सफ़र स्वतंत्रता संग्रामी के रूप में शुरू हुआ. 1942 में भारत छोड़ो आन्दोलन में बाकि नेताओं के साथ उन्होंने भाग लिया और जेल भी गए, इसी दौरान उनकी मुलाकात भारतीय जनसंघ के लीडर श्यामा प्रसाद मुखर्जी से हुई. अटल जी ने मुखर्जी जी के साथ राजनीती के दाव पेंच सीखे. मुखर्जी जी का स्वास्थ ख़राब रहने लगा और जल्दी ही उनकी मौत हो गई, इसके बाद अटल जी ने ही भारतीय जनसंघ की बागडौर संभाल ली और इसका विस्तार पुरे देश में किया.

  • 1954 में बलरामपुर से वे मेम्बर ऑफ़ पार्लियामेंट चुने गए. जवानी के दिनों में भी अटल जी को अपनी सोच व समझ के कारण राजनीती में काफी आदर व सम्मान मिला.
  • 1968 में दीनदयाल उपाध्या की मौत के बाद अटल जी जन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए. इसके बाद उन्होंने कुछ सालों तक नानाजी देसाई, बलराज मध्होक व लाल कृष्ण आडवानी के साथ मिलकर जन संघ पार्टी को भारतीय राजनीती में आगे बढ़ाने के लिए कड़ी मेहनत की.
  • 1977 में भारतीय जन संघ पार्टी ने भारतीय लोकदल के साथ गठबंधन कर लिया, जिसे जनता पार्टी नाम दिया गया. जनता पार्टी ने बहुत जल्दी ग्रोथ की और लोकल चुनाव में उसे सफलता भी मिली, इसके बाद जनता पार्टी के लीडर मोरारजी देसाई जब प्रधानमंत्री बने और सत्ता में आये तब अटल जी को एक्सटर्नल अफेयर मिनिस्टर बनाया गया. इसी के बाद वे चाइना व पाकिस्तान दौरे में गए, जहाँ उन्होंने इस देशों से भारत के संबंध सुधारने का प्रस्ताव रखा.
  • 1979 में जब मोरारजी देसाई ने प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया, तब जनता पार्टी भी बिखरने लगी. अटल जी ने 1980 में लाल कृष्ण आडवानी व भैरव सिंह शेखावत के साथ मिल कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) बनाई, और पार्टी के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए. अगले पांच सालों तक अटल जी ही पार्टी के अध्यक्ष रहे.
  • 1984 के चुनाव में बीजेपी सिर्फ 2 सीट से हारी, जिसके बाद अटल जी ने पार्टी को मजबूत बनाने के लिए जी तोड़ काम किया और पार्लियामेंट के अगले चुनाव 1989 में बीजेपी 88 सीटों की बढ़त के साथ आगे रही.
  • 1991 में विपक्ष की मांग के चलते एक बार फिर पार्लियामेंट में चुनाव हुआ, जिसमें एक बार फिर बीजेपी 120 सीटों के साथ आगे रही.
  • 1993 में अटल जी सांसद में विपक्ष के लीडर बनके बैठे. नवम्बर 1995 में मुंबई में हुई बीजेपी कांफ्रेंस में अटल जी को बीजेपी का प्रधानमंत्री प्रत्याशी घोषित किया गया
अटल बिहारी वाजपेयी का प्रधानमंत्री बनने का सफ़र –
  • 1996 में हुए चुनाव में बीजेपी एक अकेली सबसे बड़ी राजनैतिक पार्टी थी. मई 1996 में बीजेपी को जीत मिली और अटल जी को प्रधानमंत्री पद के लिए चुना गया. लेकिन बीजेपी को दूसरी पार्टियों से सपोर्ट नहीं मिला, जिस वजह से बीजेपी सरकार गिर गई और मात्र 13 दिन में अटल जी को पद से इस्तीफा देना पड़ा.
  • 1996 से 1998 के बीच में 2 बार दूसरी सरकारें बनी लेकिन सपोर्ट ना मिलने से वे भी गिर गई. इसके बाद बीजेपी ने दूसरी पार्टियों के साथ मिलकर नेशनल डोमेस्टिक पार्टी (NDA) का गठन किया. बीजेपी फिर सत्ता में आई लेकिन इस बार भी उनकी सरकार 13 महीने की रही, अन्ना द्रविदा मुन्नेत्रा पार्टी ने अपना सपोर्ट वापस ले लिया था.
  • 1999 में कारगिल में हुई भारत पाकिस्तान के युद्ध में भारत को मिली विजय ने अटल जी की सरकार को और मजबूत बना दिया. इस जीत से लोग उन्हें एक अच्छे भावी लीडर के रूप में देखने लगे.
  • इसके बाद हुए चुनाव में बीजेपी ने NDA को फिर से मजबूत किया, और चुनाव में खड़े हुए. कारगिल की जीत से भारतवासी बहुत प्रभावित हुए, और सबने बीजेपी को फिर से जीता दिया, जिसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी तीसरी बार प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे.
  • बाजपेयी सरकार ने इस बार पुरे 5 साल पुरे किये, और पहली नॉन कांगेस पार्टी बन गई. सभी पार्टीयों के सपोर्ट से अटल जी ने निर्णय लिया कि वे देश की आर्थिक व्यवस्था को सुधारने के लिए प्राइवेट सेक्टर को आगे बढ़ाएंगे. अटल जी की मुख्य योजनायें नेशनल हाईवे डेवलपमेंट प्रोजेक्ट व प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना रही.
  • अटल जी विदेश में इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा दिया व आईटी सेक्टर के प्रति लोगों को जागरूप किया. सन 2000 में अमेरिका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन भारत दौरे पर आये, इस दौरे का दोनों देश की प्रगति व रिश्ते में बहुत प्रभाव पड़ा.
  • 2001 में अटल जी ने पाकिस्तान के रास्ट्रपति परवेज मुशर्रफ़ को भारत आने का न्योता भेजा. वे चाहते थे भारत पाक के रिश्तों में सुधार हो, आगरा में हुई ये वार्ता आज तक लोगों को याद है. इसके बाद लाहौर के लिए बस भी शुरू हुई जिसमें खुद अटल जी ने सफ़र किया. लेकिन उनकी ये मुहीम सफल नहीं रही, अटल जी की फोरेन पालिसी ने बहुत बदलाव नहीं किया, लेकिन इस बात को जनता ने बहुत सराहा.
  • 2001 में अटल जी ने सर्व शिक्षा अभियान की भी शुरुवात की.
  • आर्थिक सुधार के लिए अटल जी ने बहुत सी योजनायें शुरू की, जिसके बाद 6-7 % ग्रोथ रिकॉर्ड की गई. इसी समय पूरी दुनिया में भारत का नाम जाना जाने लगा.
  • 2004 में कांग्रेस की जीत के साथ अटल जी ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.
  • सन 2005 में अटल जी ने राजनीती से रिटायरमेंट की बात घोषित कर दी. इसके बाद 2009 में हुए चुनाव में उन्होंने हिस्सा भी नहीं लिया.
बड़े मुख्य काम –
  • सत्ता में आने के जस्ट 1 महीने बाद अटल जी व उनकी सरकार ने मई 1998 में राजिस्थान के पोखरम में 5 अंडरग्राउंड नूक्लियर का सफल टेस्ट करवाए. परीक्षण पूरी तरह से सफल रहा, जिसकी चर्चा देश विदेश में भी जोरों पर रही.
  • अटल जी द्वारा शुरू किये गए नेशनल हाईवे डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (NHDP) व प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) उनके दिल के बेहद करीब थी, वे इसका काम खुद देखते थे. NHDP के द्वारा उन्होंने देश के चार मुख्य शहर दिल्ली, मुंबई, चेन्नई व कोकत्त्ता को जोड़ने का काम किया. PMGSY के द्वारा पुरे भारत को अच्छी सड़कें मिली, जो छोटे छोटे गांवों को भी शहर से जोड़ती.
  • कारगिल युद्ध व आतंकवादी हमले के दौरान अटल जी द्वारा लिए गए निर्णय, उनकी लीडरशिप व कूटनीति ने सबको प्रभावित किया जिससे उनकी छवि सबके सामने उभर कर आई.
अटल बिहारी वाजपेयी अवार्ड व अचिवेमेंट्स (Atal Bihari Vajpayee Awards & Achivements)–
  • 1992 में देश के लिए अच्छे कार्य करने के कारण अटल जी को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया.
  • 1994 में उनको बेस्ट सांसद का अवार्ड मिला.
  • 2014 में देश के सर्वोच्य सम्मान भारत रत्न से अटल जी को सम्मानित किया गया.
    ये सम्मान उनके जन्म दिन 25 दिसम्बर को रास्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा उनके निवास स्थान पर दिया गया. अटल जी के लिए पहली बार किसी राष्ट्रपति ने प्रोटोकॉल तोड़ कर घर जाकर सम्मान दिया.
  • प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अटल जी को भारतीय राजनीती का भीष्म पितामह कहते है.
  • अटल जी चार अलग अलग प्रदेशों उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, गुजरात व दिल्ली से सांसद चुने गए.
अटल जी को संगीत का भी बहुत शौक है, उनके पसंदीदा संगीतकार लता मंगेश्वर, मुकेश व मो रफ़ी है. अटल जी ने आजीवन शादी ना करने की प्रतिज्ञा ली थी, जिस पर वे कायम भी रहे. उनकी गोद ली हुई बेटी नमिता व नंदिता के वे बेहद करीब है, अटल जी अपने सभी रिश्तेदारों से भी बेहद लगाव रखते है. 90 साल के हो चुके अटल जी अब बहुत सी बीमारियों से पीढित है, उन्हें घुटने का दर्द, शुगर और भी उम्र के हिसाब से बीमारी है. बीजेपी के लिए अटल जी एक पिता व संरक्षक है, आज देश का हर एक नागरिक अटल जी को सम्मान की द्रष्टि से देखता है. दुसरी पार्टी के सदस्य भी अटल जी को अपना प्रेरणा स्त्रोत मानते है. हम आज अटल जी को सम्मान देते है व उनके स्वास्थ और दीर्घायु होने की प्राथना करते है.




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