आधार कार्ड हेल्‍प लाइन नंबर है '1947' एक टोल फ्री नंबर शुरू


आधार कार्ड का उपयोग पहले से ज्यादा होने लगा है। कोई सरकारी काम हो या फिर अपनी पहचान के बारे में कही जानकारी देनी हो आधार कार्ड जरूरी हो गया। बैंकिंग क्षेत्र में आधार का उपयोग अधिक होता है। वहीं आधार कार्ड के बढ़ते उपयोग को देखते हुए सरकार ने इससे संबंधित हर जानकारी उपलब्ध कराने के लिए एक टोल फ्री नंबर शुरू किया है। ताकि लोगों को हर जानकारी आसानी से घर बैठे मिल सके। भारतीय विशिष्‍ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा शुरू किया गया ये हेल्‍प लाइन नंबर है '1947',  अधिकारियों के मुताबिक इससे लोगों को आधार से संबंधित हर जानकारी तुरंत हासिल हो सकेगी। ये 1947 नंबर, शुल्‍क मुक्‍त रहेगा, जो पूरे साल आईवीआरएस मोड पर चौबीस घंटे उपलब्‍ध रहेगा।

साथ ही इस सुविधा के लिए कॉल सेंटर प्रतिनिधि सुबह सात बजे से रात 11 बजे तक (सोमवार से शनिवार) उपलब्‍ध रहेंगे। रविवार के दिन प्रतिनिधि सुबह आठ से बजे से शाम 5 बजे तक उपलब्‍ध होंगे। यूआईडीएआई के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी डॉक्‍टर अजय भूषण पांडे ने बताया कि हमारा टोल फ्री हेल्‍पलाइन नंबर 1947 दोबारा शुरू किया गया है, ताकि ज्‍यादा से ज्‍यादा इनकमिंग कॉल्‍स प्राप्‍त किए जा सके। साथ ही उन्होंने कहा कि इस तरह से हर नागरिक को आधार के और नजदीक लाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि इस पर कोई सुल्क नहीं लगेगा और इस नंबर पर मोबाइल अथवा लैंडलाइन के जरिए कॉल की जा सकती है।

आंव या पेचिश का उपचार, लक्षण, परहेज


आंव(Dysentery)आने का रोग किसी भी व्यक्ति को हो जाता है तो उसे घबराना नहीं चाहिए बल्कि इसका इलाज सही तरीके से करना चाहिए-मल त्याग करते समय या उससे कुछ समय पहले अंतड़ियों में दर्द, टीस या ऐंठन की शिकायत हो तो समझ लेना चाहिए कि यह पेचिश का रोग है-इस रोग में पेट में विकारों के कारण अंतड़ी के नीचे की तरफ कुछ सूजन आ जाती है और उस हालत में मल के साथ आंव(Dysentery)या खून आने लगता है-



यदि मरोड़ के साथ खून भी आए तो इसे रक्तातिसार कहते हैं एक प्रकार का जीवाणु आंतों में चला जाता है जो पेचिश(Dysentery)की बीमारी पैदा कर देता है यह रोग पेट में विभिन्न दोषों के कुपित होने की वजह से हो जाता है-


यह रोग मक्खियों से फैलता है इसमें रोग के जीवाणु रोगी के मल में ही मौजूद रहते हैं जब कभी पेचिश(Dysentery)का रोगी खुले में मल त्याग करता है तो उस पर मक्खियां आकर बैठ जाती हैं वे उन जीवाणुओं को अपने साथ ले जाती हैं और खुली हुई खाने-पीने की चीजों पर छोड़ देती हैं फिर जो व्यक्ति उन वस्तुओं को खाता है उनके साथ वे जीवाणु उसके पेट में चले जाते हैं और इस तरह उस व्यक्ति को भी पेचिश की बीमारी हो जाती है-


आंव या पेचिश के लक्षण-


1- कच्चा और कम पचा भोजन भी पेट में कुछ समय तक पड़ा रहता है तो वह सड़कर पाचन संस्थान में घाव पैदा कर देता है इससे भी आंव(Dysentery)का रोग हो जाता है-


2- शुरू में नाभि के पास तथा अंतड़ियों में दर्द होता है और लगता है जैसे कोई चाकू से आंतों को काट रहा है इसके बाद गुदा द्वार से पतला,लेसदार और दुर्गंधयुक्त मल बाहर निकलना शुरू हो जाता है पेट हर समय तना रहता है और बार-बार पाखाना आता है तथा मल बहुत थोड़ी मात्रा में निकलता है जिसमें आंव और खून मिला होता है कभी-कभी बुखार भी आ जाता है-


3- जब आंव आने का रोग किसी व्यक्ति को हो जाता है तोइसके कारण व्यक्ति के मल के साथ एक प्रकार का गाढ़ा तेलीय पदार्थ निकलता है आंव रोग से पीड़ित मनुष्य को भूख भी नहीं लगती है रोगी को हर वक्त आलस्य, काम में मन न लगना, मन बुझा-बुझा रहना तथा अपने आप में साहस की कमी महसूस होती है-


आंव या पेचिश(Dysentery) का उपचार-




1- दस ग्राम सूखा पुदीना और दस ग्राम अजवायन तथा एक चुटकी सेंधा नमक और दो बड़ी इलायची के दाने लेकर आप इन सबको पीसकर चूर्ण बना लें तथा सुबह-शाम भोजन के बाद एक-एक चम्मच चूर्ण मट्ठे या ताजे पानी के साथ लें-


2- पुरानी पेचिश में तीन-चार दिन तक काली गाजर का रस सुबह-शाम भोजन के बाद सेवन करें-


3- आम की गुठली को सुखा लें फिर उसमें से गिरी निकालकर पीसें और दो चम्मच चूर्ण दही या मट्ठे के साथ सेवन करें-


4- चार-पांच कालीमिर्च मुख में रखकर चूसें तथा थोड़ी देर बाद आधा गिलास गुनगुना पानी पी लें


5- दो चम्मच जामुन का रस और दो चम्मच गुलाबजल आप दोनों को मिलाकर उसमें जरा-सी खांड़ या मिश्री डालकर तीन-चार दिन तक पिएं


6- अनारदाना,सौंफ तथा धनिया-इन तीनों को 100-100 ग्राम की मात्र में कूट-पीसकर चूर्ण बना लें फिर आप इसमें थोड़ी-सी मिश्री मिलाकर दिन भर में चार बार नीम की सात-आठ कोंपलें और मिश्री के साथ सेवन करें


7- एक कप गरम पानी में दस ग्राम बबूल का गोंद डाल दें और थोड़ी देर बाद जब बबूल फूल जाए तो पानी में मथकर उसे सेवन करें ये मल को बांधता है


8- कच्चे केले का रस एक चम्मच सुबह और एक चम्मच शाम को जीरा या कालीमिर्च के साथ सेवन करें


9- एक चम्मच ईसबगोल की भूसी 250 ग्राम दूध में भिगो दें और जब भूसी फूल जाए तो रात को जरा-सी सोंठ और जरा-सा जीरा मिलाकर सेवन करें


10- पुराने आंव को ठीक करने के लिए प्रतिदिन सुबह बिना कुछ खाए-पिए दो चम्मच अदरक का रस जरा-सा सेंधा नमक डालकर सेवन करें या फिर पुरानी पेचिश में आधा चम्मच सोंठ का चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लें


11- बीस ग्राम फिटकिरी और तीन ग्राम अफीम पीसकर मिला लें तथा इसमें से दो रत्ती दवा सुबह-शाम पानी के साथ लें


12- छोटी हरड़ का चूर्ण घी में तल लें फिर वह चूर्ण एक चुटकी और चार ग्राम सौंफ का चूर्ण मिलाकर दें


13- जामुन के पेड़ की छाल 25 ग्राम की मात्र में लेकर सुखा लें फिर उसका काढ़ा बनाएं और ठंडा होने पर दो चम्मच शहद मिलाकर पी जाएं


14- खूनी पेचिश में मट्ठे के साथ एक चुटकी जावित्री लेने से भी काफी लाभ होता है


15- सौंफ का तेल पांच या छ: बूंदें एक चम्मच चीनी में रोज दिन में चार बार लें


16- पेचिश रोग में नीबू की शिकंजी या दही के साथ जरा-सी मेथी का चूर्ण बहुत लाभदयक है


17- सेब के छिलके में जरा-सी कालीमिर्च डालकर चटनी पीस लें अब इस चटनी को सुबह-शाम भोजन के बाद सेवन करें


18- पेचिश होने पर आधे कप अनार के रस में चार चम्मच पपीते का रस मिलाकर पिएं


19- केले की फली को बीच से तोड़कर उसमें एक चम्मच कच्ची खांड़ रखकर खाएं तथा एक बार में दो केले से अधिक न खाएं



परहेज-
1- जितना हो सके आप बासी भोजन, मिर्च-मसालेदार पदार्थ, देर से पचने वाली चीजें, चना, मटर, मूंग आदि का सेवन न करें


2- वायु बनाने वाले पदार्थ खाने से भी पेचिश में आराम नहीं मिलता है अत: बेसन, मेदा, आलू, गोभी, टमाटर, बैंगन, भिण्डी, करेला, टिण्डे आदि नहीं खाना चाहिए


3- रोगी को भूख लगने पर मट्ठे के साथ मूंग की दाल की खिचड़ी दें


4- पानी में नीबू निचोड़कर दिनभर में चार गिलास पानी पिएं-इससे पेचिश के कारण होने वाली पेट की खुश्की दूर होती रहेगी


5- भोजन के साथ पतला दही, छाछ, मट्ठा आदि अवश्य लें तथा सुबह-शाम खुली हवा में टहलें और स्नान करने से पहले सरसों या तिली के तेल की शरीर में मालिश अवश्य करें-रात को सोते समय दूध के साथ ईसबगोल की भूसी एक चम्मच की मात्रा में लेने से सुबह सारा आंव निकल जाता है

हांगकांग के शिक्षण संस्थानों में पोस्टर लगे लोकतंत्र के समर्थन में


हांगकांग, रायटर। लोकतंत्र के समर्थन में हांगकांग के दर्जन भर से ज्यादा शिक्षण संस्थानों के परिसरों में पोस्टर लगाए गए हैं। इसमें चीन पर लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने का आरोप लगाया गया है। ऐसे में हांगकांग में फिर राजनीतिक माहौल गरम हो सकता है।
'एक देश, दो प्रणाली' सिद्धांत के आधार पर ब्रिटेन ने वर्ष 1997 में हांगकांग को चीन को सौंपा था। सात विश्वविद्यालयों के नोटिस बोर्ड पर चीन से स्वतंत्रता हासिल करने की वकालत की गई है। लोकतंत्र समर्थकों ने कुछ भवनों पर बड़े-बड़े काले बैनर लगा दिए हैं। हांगकांग की नेता कैरी लाम ने इसे चीन की संप्रभुता का उल्लंघन करार देते हुए आलोचना की है। उन्होंने संबंधित संस्थानों से उचित कार्रवाई करने को कहा है।
प्रतिष्ठित चाइनीज यूनिवर्सिटी समेत कुछ अन्य कॉलेजों ने घटना को असंवैधानिक करार दिया है, लेकिन कुछ संस्थानों ने इन पोस्टर-बैनर को बने रहने दिया है। रविवार को 13 संस्थानों ने साझा बयान जारी कर लाम और विश्वविद्यालय प्रशासन पर अभिव्यक्ति की आजादी को सीमित करने के प्रयास का आरोप लगाया है। वर्ष 2014 में लोकतंत्र समर्थकों ने व्यापक जनआंदोलन किया था, जिसके बाद कई शीर्ष नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था।

समझौता ब्लास्ट मामले में सुनवाई।


पानीपत के बहुचर्चित  समझौता ब्लास्ट मामले में आज पंचकूला में हुई सुनवाई।

पंचकूला स्थित हरियाणा की विशेष NIA कोर्ट में हुई आज मामले की सुनवाई।

ब्लास्ट के मुख्य आरोपी स्वामी असीमानंद सहित सभी आरोपी हुए कोर्ट में पेश।

मामले में आज कोर्ट में सुनवाई के लिए पाकिस्तानी गवाहों के न पहुँचने के चलते भारतीय गवाहों के ही हुए बयान दर्ज।

आज की सुनवाई के दोरान 2 गवाहों के  हुए बयान दर्ज।

मामले की अगली सुनवाई अब 22 सितंबर को होगी।

समझौता ब्लास्ट मामले में पाकिस्तानी नागरिकों ने कोर्ट में पेशी के लिए पाकिस्तानी दूतावास के ज़रिए 4 महीनों का समय और मांगा था।

ब्लास्ट मामले में NIA कोर्ट ने 13 पाकिस्तानी नागरिकों को किये थे सम्मन।

जिसपर पाकिस्तानी नागरिकों की गवाहियां अब 27,28 व 29 नवंबर को होंगी।

कर्ज से मुक्ति और धन प्राप्ति के लिये विशेष ज्योतिष उपाय




कर्ज से मुक्ति और धन प्राप्ति के लिये विशेष ज्योतिष उपाय
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घर की आर्थिक हालात से विवश होकर कर्ज लेना बहुत ही कष्ट कारी फैसला होता है और किसी कारण वश उस कर्ज को चुकता ना कर पाना और कर्जदाता का बार बार तकादा करना सामाजिक शर्मिंदगी का कारण बन जाता है । आदरणीय गूरू जी की प्रेरणा से हम आपके लिये ज्योतिष विधा का वह अचूक उपाय बता रहे हैं जिसको करने से कर्ज से मुक्ति भी मिल जाती है और धन प्राप्ति के नये रास्ते भी खुल जाते है । विश्वास में ही शक्ति है ।
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यह प्रयोग इस प्रकार है । पीतल से बने दीपक को गंगा जल से साफ करके सरसों के तेल से भर लें । घर में स्थित मन्दिर में चावलों की एक छोटी ढेरी लगाकर इस दीपक को उसके ऊपर स्थापित कर दें । इसमें एक छोटी सी डली साबुत सेंधा नमक की भी डाल दें और देशी कपास की अपने हाथ से बनी हुयी बाती लगाकर प्रज्वलित करें । शनि देव की विशेष कृपा के लिये यही प्रयोग लोहे के दीपक में शनि प्रतिमा के सामने भी किया जा सकता है ।
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यह प्रयोग 45 अथवा 54 दिन तक लगातार किया जाता है और इस दौरान साधक को माँस-मदिरा का सेवन और स्त्री संग करना निषेध होता है । ध्यान रखें कि यह प्रयोग रोज सुबह को स्नान आदि कर्मों से निवृत होकर साफ कपड़े पहन कर ही करना चाहिये ।
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इस ब्लॉग से सम्बंधित आपके कुछ सुझाव हो तो आप हमें कमेण्ट बॉक्स में बता सकते हैं ।

हनुमान जयंती के दिन कीजिये टोटके - दूर होगी पैसे की तंगी




हनुमान जयंती के दिन कीजिये टोटके, दूर होगी पैसे की तंगी
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हनुमान जयंती हिंदुओं का एक बहुत ही महत्तवपूर्ण पर्व है । हनुमान जी को सबकी रक्षा और सहायता करने वाला देव माना गया है । वानरराज की जयंती के दिन कुछ आसान टोटके आपकी धन की कमी को पूरा कर सकते हैं । मंगलवार को हनुमान जयंती पर ये विशेष फलदायी होते हैं । जानिये इन टोटकों के बारे में ।
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टोटका नम्बर 1 :-
सरसों के कच्ची धानी के तेल को एक मिट्टी के दीपक में डालकर उसमें एक जौड़ा लौंग डालकर रूई की बत्ती बनाकर, दीपक जलाकर हनुमान जी की आरती करने से संकट दूर होता है और धन प्राप्ति के भी नये साधन बनते हैं ।
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टोटका नम्बर 2 :-
कई बार धन लाभ होते होते रह जाता है या ज्यादा मेहनत करने पर भी उचित धन की प्राप्ति नही होती है । इस दशा में बजरंगबली की मदद से ग्रहों को अपने अनुकूल करने के लिये हनुमान जयंती अथवा मंगलवार और शनिवार के दिन गोपी चंदन की नौ डलियॉ लेकर उनको पीले धागे से बाँधकर केले के वृक्ष पर टाँग देना चाहिये और किसी से बिना बोले अपने अपने घर को लौट आना चाहिये ।

टोटका नम्बर 3 :-
एक नारियल लेकर उस पर कामिया सिंदूर, मौली और अक्षत को अर्पण करना चाहिये फिर इस नारियल का पूजन कर इसको हनुमान जी के मंदिर में चढ़ा देना चाहिये । यह धनलाभ का बहुत उत्तम उपाय है ।
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टोटका नम्बर 4 :-
पीपल के पेड़ की जड़ के पास सरसों के तेल का दीपक जला कर रख दें और घर आ जायें । ध्यान रखें कि दीपक की लौ से पेड़ जलना नही चाहिये और वापस आते समय किसी से बोले नही और ना ही पीछे मुड़कर देखें ।
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आज हनुमान जयंती के अवसर पर मंगलवार है अतः इन टोटको का विशेष महत्तव बढ़ गया है, हालाँकि इन टोटकों को सम्पूर्ण वर्ष मंगलवार और शनिवार को किया जा सकता है ।

तिल्ली (Spleen) बढ़ गयी है - घरेलूउपचार



तिल्ली (Spleen) बढ़ गयी है तो ये घरेलूउपचार बहुत काम के सिद्ध होते हैं
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तिल्ली हमारे शरीर का एक बहुत ही बहुत महत्तवपूर्ण अंग है जो सारे शरीर की रोग प्रतिरोधी शक्ति बढ़ाने के लिये चुपचाप काम करता रहता है । तिल्ली में अक्सर समस्यायें कम होती हैं किंतु यदि कोई समस्या हो भी जाये तो आयुर्वेदिक चिकित्सा और आयुर्वेदिक घरेलू नुस्खों के द्वारा उन पर काबू पाया जा सकता है । इस पोस्ट में जानिये कुछ ऐसे अति लाभकारी घरेलू नुस्खों के बारे में जो तिल्ली बढ़ जाने की समस्या में बहुत अच्छा परिणाम देते हैं ।
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1 :- नीम्बू का प्रयोग :-
नीम्बू को हल्का गर्म करके उसको बीच में से काटकर उस पर सेंधा नमक लगाकर रोज दोनों समय भोजन से पूर्व चूसने से कुछ ही सप्ताहों में तिल्ली अपने आकार में वापिस आ जाती है ।
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2 :- पपीते का सेवन :-
तिल्ली बढ़ने की समस्या में पपीते का सेवन बहुत ही लाभकारी माना जाता है । तिल्ली के रोगी को रोज एक बार कच्चे पपीते की सब्जी अथवा पके पपीते के फल का सेवन जरूर करना चाहिये ।
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3 :- करेले का सेवन :-
करेले का सेवन तिल्ली के रोगी के लिये अमृत से कम नही होता है । तिल्ली के बढ़ जाने के रोगियों को रोज 100 मिलीलीटर करेले के रस का सेवन जरूर करना चाहिये ।
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4 :- अजवायन का सेवन :-
अजवायन का सेवन तिल्ली के रोगी को किसी ना किसी तरह से जरूर करना चाहिये । अजवायन को भून कर भी खाया जा सकता है और कच्चा भी पानी के साथ सेवन किया जा सकता है । भूनी हुयी अजवायन को गाजर के ताजे निकाले हुये रस के साथ घोलकर भी सेवन करने से बहुत ही उत्तम लाभ प्राप्त होते हैं ।

5 :- बथुये और मूली का सेवन :-
तिल्ली के रोगी के लिये बथुये और मूली का सेवन बहुत ही ज्यादा अच्छा माना जाता है । तिल्ली बढ़ जाने पर बथुये और मूली के पत्तों का रस का सेवन किया जा सकता है अथवा चोकर वाले आटे में बथुये और मूली की चपातियॉ बना कर खायी जा सकती हैं ।
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इस पोस्ट के माध्यम से दी गयी जानकारी हमारी समझ में पूरी तरह से हानिरहित हैं, फिर भी आपके आयुर्वेदिक चिकित्सक के परामर्श से ही इन प्रयोगों को करने की हम आपको सलाह देते हैं ।
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इस पोस्ट के माध्यम से दी गयी यह जानकारी आपको अच्छी और लाभकारी लगी हो तो कृपया लाईक और शेयर जरूर करें । आपके एक शेयर से किसी जरूरतमंद तक सही जानकारी पहुँच सकती है और हमें भी आपके लिये और बेहतर लेख लिखने की प्रेरणा मिलती है ।

हनुमान जी के पंचमुखी रूप - जानिये पौराणिक कथा



कैसे मिला हनुमान जी को पंचमुखी रूप, जानिये पौराणिक कथा
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भगवान श्री राम के अनन्य भक्त भगवान हनुमान जी की बहुत सी लीलायें और कथायें आपने सुनी और सुनाई होंगी । इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कि भगवान हनुमान जी को अपना दुर्लभ मंचमुखी रूप कैसे प्राप्त हुआ । बहुत अच्छी जानकारी है पूरी श्रद्धा से पढ़ियेगा । बोल राजा रामचन्द्र की जय ।
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कथा इस प्रकार शुरू होती है माता सीता को छुड़ाने के लिये भगवान राम और रावण की सेना में भयंकर युद्ध चल रहा था और रावण पराजय की कगार पर पहुँच गया था । तब अपनी पराजय को सामने देख रावण ने अपने भाई अहिरावन को बुलाया । अहिरावन मायावी शक्तियों और तंत्र-मंत्र का ज्ञाता था । उसने युद्ध के मैदान में आकर अपनी मायावी शक्तिओं के बल पर भगवान राम की सारी सेना को मायावी नींद में सुला दिया और भगवान राम और उनके भाई लक्ष्मण को अपहरण कर पाताल लोक ले गया ।
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कुछ समय पश्चात जब भगवान राम की तरफ से लड़ रहे विभीषण को होश आया तो वह समझ गया कि यह कार्य मायावी अहिरावन का ही है और उसने यह बात हनुमान जी को बताई । तब हनुमान जी श्रीराम और लक्ष्मण की सहायता के लिये पाताल लोक की तरफ जाने लगे । पाताल लोक के द्वार पर ही हनुमान जी ने मकरध्वज को परास्त किया था ।
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अहिरावन मा भगवती का उपासक था और उसको वरदान स्वरूप 5 दीपक अलग अलग दिशाओं में जला रखे थे । उसको वरदान था कि जब कोई एक साथ उन पाँचों दीपकों को बुझायेगा तो अहिरावण की मृत्यु होगी । अतः अहिरावण नें उन पाँचों दीपको को पाँच अलग अलग दिशाओं में रखकर जला रखा था । हनुमान जी को यह बात विभीषण ने बता दी थी । तब प्रभु राम के आशीर्वाद से अहिरावन को मारने के लिये हनुमान जी को पंचमुखी रूप की प्राप्ति हुयी जिसमे उत्तर दिशा में वराह मुख, पश्चिम दिशा में गरुड़ मुख, दक्षिण दिशा में नरसिंह मुख, पूर्व दिशा में हनुमान मुख और आकाश की तरफ हयग्रीव मुख स्थापित हुआ । इन पंचमुखों के द्वारा हनुमान जी ने उन पाँच दीपकों को एक साथ बुझाकर अहिरावन का वध किया और उसकी मायावी शक्तियों का अन्त करके भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को मुक्त करवाया ।
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बोलो बजरंग बली की जय ।

थाइरॉइड में वजन बढ़ रहा है - काली मिर्च और हल्दी है अचूक इलाज



थाइरॉइड के कारण वजन बढ़ रहा है तो काली मिर्च और हल्दी है अचूक इलाज
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थाइरॉइड की समस्या जितनी आम होती जा रही है उतना ही ज्यादा इसके समाधान के बारे में खोज की जा रही हैं । असली दिक्कत तब होती है जब थाइरॉइड के कारण रोगी का वजन अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगता है । इस विकट समस्या का समाधान जानिये इस पोस्ट में ।
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थाइरॉइड की समस्या में मुख्य परेशानी आती है थाय्रॉक्सिन के स्तर में कमी होना और ज्यादातर महिलाओं में यह समस्या पायी जाती है । कुछ रिसर्च में यह पाया गया है कि हल्दी में पाया जाने वाला तत्व कुरक्यूमिन और काली मिर्च में पाया जाने वाला तत्व पेपेराईन, ये दोनों मिलकर थाइरॉइड की समस्या को नियंत्रित करने में बहुत प्रभावी होते हैं । यहॉ गौर करने वाली बात यह है कि ये दोनों ही चीजे रसोईघर में बहुत आसानी से उप्लब्ध हो जाती हैं और ये दोनों ही थाइरॉइड को रेग्यूलेट करने के साथ साथ शरीर की अतिरिक्त चर्बी को जलाने में भी बहुत सटीकता से काम करती हैं । इनका प्रयोग बहुत ही आसान है । आइये जानते हैं इस प्रयोग के बारे में ।
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पहले दिन एक काली मिर्च के दाने के चूर्ण को और एक ग्राम हल्दी चूर्ण को मिलाकर सुबह सवेरे खाली पेट गुनगुने पानी के साथ सेवन करना है । उसके बाद एक घण्टे तक कुछ ना खाये । दूसरे दिन काली मिर्च के दो दाने और हल्दी के दो ग्राम चूर्ण को सेवन करना है । इस तरह सातवें दिन तक जाना है । जब सातवें दिन सात काली मिर्च और सात ग्राम हल्दी चूर्ण का सेवन हो जाये तो आठवे दिन से एक-एक काली मिर्च का दाना और एक-एक ग्राम हल्दी चूर्ण की मात्रा घटानी है ।
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जब चौहदवें दिन एक काली मिर्च का दाना और एक ग्राम हल्दी का सेवन हो तो उसके बाद दोबारा सात दिन तक एक एक काली मिर्च और एक ग्राम हल्दी चूर्ण को बढ़ाते जायें । इस तरह बढ़ते और घटते क्रम में यह प्रयोग लगातार तीन महीने तक करना है । यदि नियम से कर लिया तो बहुत अच्छे लाभ मिलने की बहुत ज्यादा उम्मीद होती है ।
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इस पोस्ट के माध्यम से दी गयी यह जानकारी हमारी समझ में पूरी तरह हानिरहित है, फिर भी आपके आयुर्वेदिक चिकितक के परामर्श से ही इस प्रयोग को करने की हम आपको सलाह देते हैं ।
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गुर्दों को डिटॉक्स कीजिये - इस ड्रिंक के साथ



गुर्दों को डिटॉक्स कीजिये बहुत ही किफाइती तरीके से अपने घर पर ही, इस ड्रिंक के साथ
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उल्टा सीधा खान-पान और तरह तरह के हानिकारक ड्रिंक पीने से गुर्दों के ऊपर हम पूरे दिन अत्याचार करते रहते हैं, एक समय के बाद जरूरी हो जाता है कि हम गुर्दों की सफाई करें और वो भी प्राकृतिक तरीके से । इस पोस्ट में हम आपको बता रहे हैं एक ऐसा ड्रिंक जो गुर्दों को बहुत प्यार के साथ डिटॉक्स करता है । आइये जानते हैं ।

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गुर्दों को डिटॉक्स करने वाली यह ड्रिंक बनाने का तरीका बहुत सरल है इसके लिये हमको निम्न सामग्रियों की जरूरत पड़ेगी ।
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1 :- ताजा हरा धनिया 100 ग्राम
2 :- खाने का सोडा 2 चुटकी
3 :- नीम्बू आधा ताजा कटा हुआ
4 :- ताजा साफ पानी 500 मिलीलीटर

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ड्रिंक बनाने की विधी :-
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सबसे पहले धनिये की हरी पत्तियों को अच्छे से धोकर थोड़ा सा कूट लें और ताजे पानी के साथ एक स्टेनलेस स्टील के बरतन में तब तक उबालें जब तक पानी जलकर 300 मिलीलीटर रह जाये । अब इसको उतारकर ठण्डा कर लें । जब पीने लायक गरम रह जाये तो इसको छान लें और इसमें आधा नीम्बू का रस और दो चुटकी खाने का सोडा मिलाकर पी लें । यह ड्रिंक हर दस बारह दिन के बाद पी जा सकती है ।
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ध्यान दें कि यह ड्रिंक सिर्फ स्वस्थ गुर्दे को डिटॉक्स करने का काम करती है । गुर्दे की किसी बीमारी में इस ड्रिंक का सेवन अपने आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह के बाद ही करें । इस पोस्ट के माध्यम से दी गयी यह जानकारी हमारी समझ में पूरी तरह से हानिरहित है । फिर भी आपके आयुर्वेद चिकित्सक के परामर्श से ही इस ड्रिंक को सेवन करने की हम सलाह देते हैं ।
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कच्चे केले का हलवा व्रत में खाने के लिये



कच्चे केले का हलवा व्रत में खाने के लिये फलाहार

व्रत रखने वाले बहन भाइयों के लिये एक बहुत ही स्वादिष्ट और पौष्टिक फलाहार के बारे में हम आपको बता रहे हैं । यह फलाहार व्रत में ऊर्जा भी देता है और लम्बे समय तक के लिये भूख भी नही लगने देता है । इस फलाहार का नाम है कच्चे केले का हलवा । यह खाने में जितना टेस्टी होता है बनाने मे उतना ही आसान होता है । तो आइये जानते हैं इस बहुत ही स्वादिष्ट और व्रत में सेवन करने योग्य कच्चे केले का हलवा बनाने की रेसिपी ।



कच्चे केले का हलवा बनाने के लिये जरूरी सामान :-
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1 :- कच्चे केले कुल तीन
2 :- चीनी 150 ग्राम
3 :- देशी घी 100 ग्राम
4 :- दूध 300 ग्राम
5 :- काजू 12-15
6 :- बादाम 12-15
7 :- किशमिश 25-30
8 :- छोटी इलायची का पाउडर आधा चम्मच



कच्चे केले का हलवा बनाने का तरीका :-

सबसे पहले कच्चे केले को दोनों तरफ से डंठल हटाकर कूकर में रखकर 2 कप पानी में एक सीटी आने तक उबालना है । ध्यान रखें की कच्चे केलों को छिलके के समेत ही उबालना है । काजू और बादाम को बारीक काट लें । किशमिश के भी डंठल तोड़कर फेंक दीजिये ।

कूकर में उबाले गये केलों के ठण्डा होने पर उनके छिलके को उतार कर फेंक दीजिये और अंदर के उबले फल को छोटे छोटे टुकड़ों में काटकर मैश कर लीजिये । एक नॉन स्टिक पैन में 4-5 चम्मच देशी घी डालकर गर्म करें और फिर इसमे मैश किये गये केले डालकर धीमी आँच पर लगातार चलाते हुये भूनें । भूनते भूनते जब केले का रंग बदलने लगे और केले में से घी छूटने लगे तो केले के मिश्रण में दूध और चीनी डालकर अच्छे से चलायें । इस मिश्रण को उबाल आने तक पकाते रहिये । जब उबाल आ जये तो इसमें कटे हुये काजू और बादाम के टुकड़े और किशमिश मिला दें । अब इस हलवे को तब तक पकाते रहें जब तक वो गाढ़ा ना हो जाये । जब हलवा गाढ़ा होने लगे तो इसमें छोटी इलायची का पाउडर मिलाकर अच्छी तरह से घोट दें । इस तरह बहुत ही स्वादिष्ट कच्चे केले का हलवा बनकर तैयार है ।

अब गैस को बंद कर दीजिये और हलवे को प्लेट में निकाल लीजिये । हलवे पर एक-दो चम्मच देशी घी ऊपर से डालें और कटे हुये काजू बादाम से सजायें । इस हलवे को गर्म भी खाया जा सकता है और थोड़ा ठण्डा भी खाया जा सकता है । फ्रीज का रखा हुया ना खायें ।

फलाहारी इडली व्रत में उत्तम आहार



फलाहारी इडली व्रत में पौष्टिक और उत्तम आहार
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प्रायः व्रत रखने वालों के सामने यह समस्या रहती है कि व्रत का पारायण करते समय क्या खाया जाये, क्योकि अधिकतर लोगों को व्रत के लिये कोई विशेष रेसिपी की जानकारी नही होती है । इस पोस्ट में जानिये कि कैसे व्रत में सेवन के लिये विशेष फलाहारी इडली को बनाया जाये । सात्विकता से परिपूर्ण एक बहुत ही ठोस आहार जो व्रत रखने के दौरान बहुत लाभकारी होता है ।
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फलाहारी इडली बनाने के लिये जरूरी सामग्री :-

1 :- सामक (व्रत के चावल‌) आधा कप
2 :- कुट्टू का आटा एक कप
3 :- सेंधा नमक स्वाद के अनुसार
4 :- दरदरी कुटी हुयी मूँगफली 20-30 ग्राम
5 :- अदरक और हरी मिर्च का पेस्ट एक चम्मच
6 :- पानी एक कप
7 :- दही आधा कप
8 :- नीम्बू का रस एक चम्मच
9 :- करी पत्ता 10-12
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फलाहारी इडली के लिये चटनी बनाने की सामग्री :-

1 :- दही आधा कप
2 :- भुनी और छीली हुयी मूँगफली आधा कप
3 :- अदरक 10 ग्राम
4 :- हरी मिर्च 2-3
5 :- चीनी एक चम्मच
6 :- सेंधा नमक स्वाद के अनुसार
7 :- नीम्बू का रस स्वाद के अनुसार




फलाहारी इडली बनाने की विधी :-

सबसे पहले सामक चावल के आटे में कुट्टू का आटा मिलाकर उसमें दही, अदरक-हरी मिर्च का पेस्ट, सेंधा नमक, नीम्बू का रस और करी पत्ता डालकर मिलायें । धीरे धीरे पानी डालते हुये पेस्ट बनायें । यह पेस्ट इतना ही गाढ़ा होना चाहिये जितना कि पकोड़े का घोल रखा जाता है । अब पेस्ट तैयार हो जाने पर इसको दो घण्टे के लिये ढक कर रख दें । दो घण्टे बाद इडली बनायें । इडली बनाने के लिये ईडली के सांचे में थोडा सा घोल डालें और उस पर कूटी हुयी मूँगफली डालकर पुनः थोड़ा सा घोल और डालें । इसी तरह इडली के सभी सांचे भर लें और भाँप पर 10-12 मिनट तक पकायें । 10-12 मिनट में नरम और स्वादिष्ट ईडली पक कर तैयार हो जाती है ।
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अब नम्बर आता है चटनी बनाने का । चटनी बनाने के लिये चटनी की समस्त सामग्री को एक साथ मिक्सी में डालकर चलायें । दो-तीन मिनट मिक्सी चलाने से उत्तम चटनी तैयार हो जाती है ।
चटनी को ठण्डा और इडली को गर्म परोसें ।
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ऊपर लिखी मात्रा में सामग्री लेने से तैयार इडली दो लोगों के लिये पर्याप्त होती है । ज्यादा लोगों के लिये बनानी हो तो उसी अनुपात में सामग्री लेकर बनाया जा सकता है ।
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पनीर मखाना कोरमा व्रत की डिश

पनीर मखाना कोरमा व्रत की स्पेशल डिश





पनीर मखाना कोरमा व्रत की स्पेशल डिश
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कौन कहता है कि व्रत का खाना स्वादिष्ट नही हो सकता है ? ये बात सही है कि व्रत में अधिकतर उबले आलू और सामक के चावल की खिचड़ी ही बनाकर खा ली जाती है । किन्तु क्या आप जानते हैं कि व्रत में कुछ ऐसा अच्छा बनाया जा सकता है जो बहुत स्वादिष्ट भी होता है और पोषण से भरपूर भी । इस स्पेशल डिश का नाम है पनीर मखाना कोरमा । आइये जानते हैं इस डिश को बनाने की रेसीपि
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पनीर मखाना कोरमा बनाने के लिये जरूरी सामग्री :-
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1 :- पनीर 100 ग्राम
2 :- मखाना 1 कप
3 :- जीरा पाउडर 1 चम्मच
4 :- काली मिर्च पाउडर आधा चम्मच
5 :- धनिया पाउडर 1 चम्मच
6 :- कद्दुकस किया गया लौकी आधा कप
7 :- कद्दुकस किये गये 3 टमाटर
8 :- अदरक-हरी मिर्च का पेस्ट 1 चम्मच
9 :- इलायची पाउडर
10 :- धनिया पत्ती 1 चम्मच
11 :- सेंधा नमक स्वाद के अनुसार
12 :- कुकिंग ऑयल एक बड़ी चम्मच

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पनीर मखाना कोरमा बनाने की विधी :-
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इस स्वादिष्ट डिश को तैयार करने के लिये सबसे पहले फ्राइंग पैन में मखानों को सूखा ही भूनिये जब तक कि वो करारे ना हो जायें । उसके बाद पैन में थोड़ा सा तेल डालकर उसमें सबसे पहले कद्दुकस की गयी लौकी को भूनें । जब लौकी गल जाये तो उसके अंदर कद्दुकस किये गये तीन टमाटर और ऊपर लिखे सभी मसाले डालकर धीमी आँच पर भूनें जब सभी सामान का एक गाढ़ा पेस्ट तैयार हो जाये तो इसमें पनीर के टुकड़े और भुने हुये मखाने डाल दें और थोड़ा सा घोंट दें । अब इसमें 2 कप पानी और स्वाद के हिसाब से सेंधा नमक मिलाकर खदका लगवा लें । जब सब्जी तैयार हो जाये तो कटोरी में परोस कर धनिया पत्ती से सजा कर सर्व करें । व्रत में भी इतना स्वादिष्ट खाना पाकर खाने वाला आपकी तारीफ करता रह जायेगा ।

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ध्यान रखें कि उपरोक्त लिखी मात्रा में सामान लेने से यह 2 लोगों के लिये पर्याप्त सब्जी तैयार होगी । ज्यादा लोगों के लिये बनानी हो तो उसी अनुपात में सामान बढ़ाकर लिया जा सकता है । इस डिश को तैयार होने में लगने वाला समय लगभग 25-30 मिनट है ।
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पनीर मखाना कोरमा बनाने की यह रेसीपि आपको अच्छी लगी हो और आसान लगी हो तो कृपया लाईक और शेयर जरूर कीजियेगा ।

व्रत वाली कढ़ी

व्रत वाली कढ़ी, व्रत रखने वालों के लिये उपहार






व्रत वाली कढ़ी, व्रत रखने वालों के लिये उपहार
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व्रत वाली कढ़ी उन लोगों को विशेष रूप से पसंद आयेगी जिनको कुछ नये स्वाद की हमेशा तलाश रहती है । इसको बनाने की रेसीपी भी बिल्कुल सरल है और स्वाद तो है ही इतना लाज़वाब की बस पूछो ही मत । इस पोस्ट में जानिये कि कैसे बनायी जाती है यह व्रत वाली कढ़ी ।
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व्रत वाली कढ़ी बनाने के लिये जरूरी सामग्री :-
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1 :- छोटे टुकड़ों में काटी गयी व उबाली गयी लौकी 2 कप
2 :- अदरक-हरी मिर्च का पेस्ट 2 चम्मच
3 :- अच्छे से फेंटा हुआ खट्टा दही 2 कप
4 :- सिंघाड़े अथवा कुट्टू का आटा 2 चम्मच
5 :- पानी 3 कप
6 :- लाल मिर्च पाउडर आधा चम्मच
7 :- दालचीनी पाउडर आधा चम्मच
8 :- जीरा 1 चम्मच
9 :- करी पत्ता 10
10 :- साबुत लाल मिर्च 2
11 :- सेंधा नमक स्वाद के अनुसार
12 :- तेल 1 चम्मच
13 :- हरा धनिया पत्ती 2 चम्मच
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व्रत वाली कढ़ी बनाने की विधी :-
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इस स्पेशल डिश को बनाने के लिये सबसे पहले फेंटी हुयी दही में सिंघाड़े का आटा, अदरक-हरी मिर्च का पेस्ट, सेंधा नमक स्वाद के अनुसार, दालचीनी पाउडर और पानी 3 कप मिलाकर अच्छे से मथ लें या फिर मिक्सी ग्राइंडर में चला लें और रख लें ।
कढ़ाही में तेल डालकर उसको गर्म करें और जब तेल गर्म हो जाये तो उसमें जीरा, साबुत लाल मिर्च, करी पत्ते डालकर तड़का लगाकर दही वाला सारा घोल उड़ेल दें और लगातार गर्म करते रहें । जब कढ़ी में उबाल आ जाये तो उसमें कद्दुकस की गयी लौकी डालकर तब तक पकायें जब तक कढ़ी गाढ़ी होनी शुरू हो जाये । फिर इसको धनिया पत्ती से सजाकर गर्म ही सर्व करें ।
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ध्यान रखें कि उपरोक्त लिखी मात्रा में सामान लेने पर यह व्रत वाली कढ़ी दो लोगों के लिये पर्याप्त बनेगी । ज्यादा लोगों के लिये बनानी हो तो उसी अनुपात में सामान ज्यादा लेकर बनायी जा सकती है । इस कढ़ी को बनने में लगने वाला समय लगभग 40-45 मिनट तक है ।
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व्रत वाली कढ़ी बनाने की रेसीपि की यह जानकारी आपको अच्छी लगी हो तो कृपया लाईक और शेयर जरूर कीजियेगा ।

अलसी - बूढ़े को जवान और जवान को फौलाद बनाता है

बूढ़े को जवान और जवान को फौलाद बनाता है अलसी का सेवन




अलसी के बीजों का लम्बे समय से आयुर्वेदिक दवाओं और नुस्खों में बहुतायत से प्रयोग किया जाता रहा है । इसके बीजों और बीज में से निकलने वाले तेल में इसके अधिकतर गुण छिपे रहते हैं । कहा जाता है कि अलसी एक फीलगुड फूड है क्योकि इसका सेवन करने वाले का मूड खिला खिला रहता है । आधुनिक अनुसंधानों में मालूम हुआ है कि अलसी के बीजों में ओमेगा-3 नामक फैटी एसिड, प्रोटीन और फाइबर तत्व प्रचुर मात्रा में मिलते हैं । ओमेगा-3 फैटी एसिड के शरीर में कम होने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और शरीर शुगर और रक्तचाप जैसी बीमारियों का आसानी से शिकार बन जाता है । अलसी के सेवन से बुढ़ापे के लक्षण शरीर से दूर रहते हैं और जवान लोगों को शरीर में ताकत का संचार साफ महसूस होता है । खास बात यह है कि अलसी के बीजों और तेल का सेवन स्त्री और पुरुष दोनों ही कर सकते हैं । अलसी के बीजों में और क्या क्या लाभ छिपे हुये हैं ।
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अलसी का सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल, रक्तचाप और दिल की धड़कन सही रहती हैं, अलसी के सेवन से एक फायदा यह भी है यह रक्त को पतला बनाये रखती है ।
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रक्तवाहिनियों में जमने वाली चिकनाई भी अलसी के सेवन से साफ होती रहती है जिस कारण ब्लॉकेज की समस्या से बचाव हो जाता है ।
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कुछ रिसर्च में मालूम हुआ है कि अलसी का सएवन करने से आँखों की रोशनी भी बढ़ती है ।
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पौरुष शक्ति की कमजोरी, शीघ्रपतन और एन्द्री के तनाव में कमी की समस्या अलसी के नियमित सेवन से कुछ हफ्तों में ठीक हो जाती है ।
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महिलाओं में रजो-निवृत्ति के समय होने वाले विभिन्न कष्टों और समस्याओं को अलसी के सेवन से नियंत्रित किया जा सकता है ।
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बॉडी बिल्डिंग के शौकीन युवा जो माँसपेशियों को बढ़ाने के लिये विभिन्न सप्लीमेण्ट्स लेते हैं उनके लिये अलसी का सेवन एक उत्तम पूरक आहार का कार्य करता है ।
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बढ़ती उम्र के साथ साथ जोड़ों में दर्द की समस्या हो ही जाती है । अलसी के सेवन से जोड़ों के बीच की प्राकृतिक चिकनाई बनी रहती है जिस कारण से यह जोड़ों के दर्द का एक बहुत उत्तम उपचार है ।
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अलसी के बीजों को सेंक कर फोड़े आदि पर सिंकाई करने से फोड़े जल्दी पक कर फूट जाते हैं और ठीक हो जाते हैं ।
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पेट में अल्सर और कब्ज के रोगियों को अलसी के सेवन से निश्चित ही लाभ मिलता है ।
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अलसी के बीजों में मौजूद तेल नाखूनों और बालों की सेहत के लिये बहुत ही अच्छा कार्य करता है । बार बार बालों और नाखूनों के टूटने से परेशान और बेजान बालों की समस्या में अलसी के तेल का सेवन एक बार कम से कम एक महीने तक अवश्य करके देखें ।



सेवन विधी :-

अलसी के बीजों को दरदरा कूटकर 20-30 ग्राम तक की मात्रा में रोज रात को अथवा दिन में एक बार किसी भी समय सेवन करना चाहिये । अलसी के बीजों को भून कर भी खाया जा सकता है । अलसी के बीजों से निकाला गया तेल 5 मिलीलीटर की मात्रा में एक बार सेवन किया जाना चाहिये । अलसी के तेल का प्रयोग बालों, नाखूनों और त्वचा की मालिश के लिये भी किया जा सकता है । इसे अधिक मात्रा में पीस कर नहीं रखना चाहिए, क्योंकि यह खराब होने लगती है। इसलिए थोड़ा-थोड़ा ही पीस कर रखें । अलसी के सेवन के समय दिन भर में कम से कम 2 लीटर पानी पीने की सलाह दी जाती है । 

बेर के छाल और पत्तों के गुण

बेर तो बहुत खाये होंगे, लीजिये इसकी छाल और पत्तों के गुणों की जानकारी




बेर एक बहुत ही सामान्य सा दिखने वाला फल होता है जिसका स्वाद बहुत ही अनुठा होता है ।
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1. बेर के पत्तो का रस दूध मे मितलाकर पीने से चेचक का रोग ठीक हो जाता है ।
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2.बेर के कोमल पत्तों को पीसकर, पानी मे मिलाकर घड़े में ड़ालकर मथनी से बिलोकर आये झागो को शरीर पर लेप करने से शरीर के सभी रोग दूर हो जाते है ।
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3. अतिसार रोग को ठीक करने के लिये बेर के पत्तों का चूर्ण बनाकर मट्ठे के साथ पीने से लाभ होता है ।
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4.बेर के पेड़ की छाल को पीस मुँह मॆं रखकर चूसते रहने से दबी आवाज खुल जाती है ।
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5. श्वेत प्रदर या रक्त प्रदर की परेशानी को दूर करने के लिये बेर की छाल का चूर्ण गुड़ या शहद के साथ मिलाकर खाने से इस रोग मे लाभ होता है ।
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6.बेर के पेड़ की छाल का काड़ा बनाकर कुल्ला करने से दाँत और मसूड़े मजबूत बनते है और लार भी टपकनी बंद हो जाती है ।
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7.गर्मियों में अक्सर पेशाब रुकने की समस्या हो जाती है इससे निज़ात पाने के लिये बेर के कोमल पत्तों और जीरा मिलाकर पीसकर पीने से लाभ होता है ।

तेजपत्ता रोगों को बहुत तेजी से कम करता है - इसके गुण

तेजपत्ता रोगों को बहुत तेजी से कम करता है, आप भी जानिये इसके गुणों को



तेजपत्ता हर घर में और बहुत सारी आयुर्वेदिक औषधियों में प्रयोग होने वाला पत्ता है । अपने विशिष्ट गुणों के कारण यह खाने का स्वाद भी बढ़ाता है और बहुत सारे रोगों को ठीक भी करता है ।


1. अगर दस्त लग जाये तो तेजपात के पत्तो का काढ़ा बनाकर पीने से दस्त मे आराम मिलता है ।
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2. तेजपात को मुँह मैं रखकर चूसने से मुँह सें बदबू आनी बंद हो जाती है ।
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3. यदि आपका बच्चा तोतला बोलता है तो उसकी जीभ के नीचे तेजपात का चूर्ण रखे , आराम मिलेगा ।
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4. तेजपात के पत्तो की चाय बनाकर पीने से जुकाम मॆं फायदा होता है ।
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5.तेजपात की पत्तियों को पीसकर हर रोज मंजन करने से दाँत मोतियों की तरह चमक उठेंगे ।
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6. तेजपात और पीपल की पत्तियों को पीसकर अदरख और शहद के साथ सेवन करने से दमा रोग मे फायदा होता है ।
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7. उल्टी या उबकाई आने पर तेजपात की छाल को पीसकर गुनगुने पानी के साथ फंकी लेने से लाभ होता है ।

लहसुन के स्वास्थय लाभ


 लहसुन से मिलने वाले स्वास्थय लाभो की यह जानकारी

1:- लहसुन को बारीक पीसकर अगर दूध में मिलाकर पिया जाये तो उच्च रक्तचाप मे लाभ होता है।
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2:- रात में सोने से पहले लहसुन की एक कली को पानी के निगलने से स्वपन दोष में लाभ होता है।
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3:- लहसुन की 4-5 कलियाँ महीन पीसकर गरम पानी में मिलाकर गरारे करने से टोंसिलाइटिस की समस्या में लाभ होता है।

4:- लहसुन ,शहद ,शक्कर ,लाख को मिलाकर पीसकर अगर घी के साथ खाया जाये तो टूटी हुई हड्डी जल्दी जुड्ती है।
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5:- लहसुन के रस मे जैतून के तेल में मिलाकर बच्चों की छाती और पीट पर मालिश करने से काली खांसी दूर हो जाती है।
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6:- लहसुन की चार कलियो का प्रातकाल सेवन करने से गैस बनना बंद हो जाता है।

7:- आधा चम्मच लहसुन के रस मे थोडा सेंधा नमक और चार चम्मच पानी मिलाकर खाने से पेट दर्द दूर हो जाता है।
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8:- गंजापन दूर करने के लिये लहसुन का रस गंजेपन वाले स्थान पर लगाने से कुच दिनो में नये बाल उग आते हैं।
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इनके अलावा अगर आप भी लहसुन से मिलने वाले कुछ अन्य स्वास्थय लाभों के बारे में जानते हैं तो हमें कमेण्ट में लिख सकते हैं ।

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मूत्रमार्ग का इन्फेक्शन, जानकारी और बचाव


यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) यानि की मूत्र मार्ग में होने वाले संक्रमण की बीमारी। यूरिनरी सिस्टम के अंग जैसे गुर्दा (किडनी) , यूरिनरी ब्लैडर और यूरेथ्रा में से कोई भी अंग जब संक्रमित हो जाए तो उसे यूटीआई संक्रमण कहते हैं। अगर समय रहते इलाज न करवाया जाए तो से यह ब्लैडर और किडनी को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

इस समस्या का शिकार वैसे तो कोई भी हो सकता है लेकिन पुरुषों के मुकाबले महिलाएं इसकी शिकार ज्यादा होती हैं। महिलाओं में 40 की उम्र के बाद ही यह परेशानी ज्यादा देखने को मिलती है क्योंकि इस दौरान शरीर में एस्ट्रोजन हॉरमोन का निर्माण कम होता है लेकिन कई बार प्राइवेट पार्ट की साफ-सफाई ना रखने व अन्य कई कारणों से कम उम्र की लड़कियों को भी इस परेशानी का सामना करना पड़ता है।
77 प्रतिशत महिलाएं अकेले पेशाब संबंधी तकलीफों की शिकार होती हैं, लापरवाही और शर्म की वजह से महिलाएं इस बारे में खुलकर बात नहीं कर पाती तब तक इंफैक्शन काफी बढ़ चुका होता है।


यूरिन इंफैक्शन के लक्षण

इसके लक्षण दिखने पर बिना किसी लापरवाही के तुरंत डाक्टर से संपर्क करें।

- मूत्र त्याग के समय जलन होना
-रुक-रुक कर पेशाब आना
- पेड़ू में दर्द
-कभी कभार मूत्र त्यागते समय खून आना
-दुर्गंध युक्त पेशाब..
- यह बुखार, उल्टी और पीठ दर्द का कारण भी बनता है।


बरतें कुछ सावधानियां

1.यूरिन को ज्यादा देर ना रोकें
अगर आप घंटों तक पेशाब को रोके रहते हैं तो ऐसा ना करें। दबाव बनने के बाद अगर 3 से 4 मिनट भी पेशाब रोका जाए तो टॉक्सिन तत्व किडनी में वापस चले जाते हैं,जिसे रिटेंशन ऑफ यूरिन कहते हैं। इस स्थिति के बार-बार होने से पथरी की शुरूआत हो जाती है। इसलिए ब्लैडर को तुरंत खाली करें। इस इंफैक्शन को दूर करने के लिए आप क्रैनबेरी जूस का सेवन कर सकते हैं।
2.सैक्स के बाद जरूर त्यागें यूरिन
इंटरकोर्स के बाद मूत्र त्याग जरूर करें क्योंकि इससे बैक्टीरिया बाहर निकल जाते हैं और इंफैक्शन का खतरा कम हो जाता हैं। खासकर डाक्टर महिलाओं को ऐसा अवश्य करने की सलाह देते हैं।
3.नमी ना रखें
मूत्र त्याग करने के बाद योनि को अच्छे से साफ करें और नमी ना छोड़ें ताकि बैक्टीरिया मूत्र मार्ग के जरिए इंफैक्शन ना फैला सकें।
4.पीरियड्स के दिनों में साफ सफाई
माहवारी के दिनों में प्राइवेट पार्ट की साफ-सफाई का खास ध्यान रखें। इस्तेमाल किए जाने वाले सैनिटरी नैपकिन को हर 6 घंटे में बदलें।
5.बबल बाथ को कहे ना
बाथटब में बबल बाथ लेने से बचें क्योंकि झागदार पानी में लंबे समय तक गिला रहने से मूत्रमार्ग में जलन पैदा हो सकती हैं।

हल्दी वाला दूध पीने के फायदे

हल्दी वाला दूध पीने के बहुत सारे फायदे हैं, आप जानते हैं कि नही ?



आम तौर पर सर्दी होने या शा‍रीरिक पीड़ा होने पर घरेलू इलाज के रूप में हल्दी वाले दूध का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं, कि हल्दी वाले दूध के एक नहीं अनेक फायदे हैं? आयुर्वेद में हल्दी को सबसे बेहतरीन नेचुरल एंटीबायोटिक माना गया है। इसलिए यह स्किन, पेट और शरीर के कई रोगों में उपयोग की जाती है। हल्दी व दूध दोनों ही गुणकारी हैं, लेकिन अगर इन्हें एक साथ मिलाकर लिया जाए तो इनके फायदे दोगुना हो जाते हैं। इन्हें एक साथ पीने से यह कई स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं दूर होती हैं।
रोजाना हल्दी वाला दूध लेने से शरीर को पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम मिलता है। हड्डियां स्वस्थ और मजबूत होती है।


गठिया दूर करने में सहायक
हल्दी वाले दूध को गठिया के निदान और रियूमेटॉइड गठिया के कारण सूजन के उपचार के लिए उपयोग किया जाता है। यह जोड़ो और पेशियों को लचीला बनाकर दर्द को कम करने में भी सहायक होता है।

वजन कम करने में सहायक
वजन कम करना हल्दी वाले दूध से पोषण के फैट्स को नष्ट करने में सहायता मिलती है। यह वजन को कंट्रोल करने में सहायक होता है।

सांस संबंधी बीमारियां
सांस संबंधी बीमारियां हल्दी वाला दूध प्रतिजैविक होने के कारण जीवाणु और विषाणु के संक्रमण पर हमला करता है। इससे सांस सम्बन्धी बीमारियों के उपचार में लाभ मिलता है। यह मसाला आपके शरीर में गरमाहट लाता है और फेफड़े व साइनस में जकड़न से तुरंत राहत मिलती है।


कैंसर
कैंसर जलन और सूजन कम करने वाले गुणों के कारण यह स्तन, त्वचा, फेफड़े, प्रॉस्ट्रेट और बड़ी आंत के कैन्सर को रोकता है। यह कैंसर कोशिकाओं से डीएनए को होने वाले नुकसान को रोकता है और कीमोथेरेपी के दुष्प्रभावों को कम करता है।


नींद न आना
हल्दी वाला गर्म दूध ट्रिप्टोफैन नामक अमीनोअम्ल बनाता है जो शान्तिपूर्वक और गहरी नींद में सहायक होता है।

सर्दी और खांसी
सर्दी और खांसी अपने प्रतिजीवाणु और प्रतिविषाणु गुणों के कारण हल्दी वाले दूध को सर्दी और खांसी का बेस्ट उपचार माना जाता है।

सेहत से जुड़ी बहुत काम की बीस टिप्स

 
टिप्स 1. प्याज के रस को गुनगुना करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक होता है।
टिप्स 2. प्रतिदिन 1 अखरोट और 10 किशमिश बच्चों को खिलाने से बिस्तर में पेशाब करने की समस्या दूर होती है।
टिप्स 3. टमाटर के सेवन से चिढ़-चिढ़ापन और मानसिक कमजोरी दूर होती है। यह मानसिक थकान को दूर कर मस्तिस्क को तंदरुस्त बनाये रखता है। इसके सेवन से दांतो व् हड्डियों की कमजोरी भी दूर होती है.
टिप्स 4. तुलसी के पत्तो का रस, अदरक का रस और शहद बराबर मात्रा में मिलाकर 1-1चम्मच की मात्रा में दिन में 3 से 4 बार सेवन करने से सर्दी, जुखाम व खांसी दूर होती है।
टिप्स 5. चाय की पत्ती की जगह तेज पत्ते की चाय पीने से सर्दी, जुखाम, छींके आना, नाक बहना ,जलन व सरदर्द में शीघ्र आराम मिलता है।
टिप्स 6. रोज सुबह खाली पेट हल्का गर्म पानी पीने से चेहरे में रौनक आती है वजन कम होता है, रक्त प्रवाह संतुलित रहता है और गुर्दे ठीक रहते है।
टिप्स 7. पांच ग्राम दालचीनी ,दो लौंग और एक चौथाई चम्मच सौंठ को पीसकर 1 लीटर पानी में उबाले जब यह 250 ग्राम रह जाए तब इसे छान कर दिन में 3 बार पीने से वायरल बुखार में आराम मिलता है।
टिप्स 8. पान के हरे पत्ते के आधे चम्मच रस में 2 चम्मच पानी मिलाकर रोज नाश्ते के बाद पीने से पेट के घाव व अल्सर में आराम मिलता है।
टिप्स 9. मूंग की छिलके वाली दाल को पकाकर यदि शुद्ध देशी घी में हींग-जीरे का तड़का लगाकर खाया जाए तो यह वात, पित्त, कफ तीनो दोषो को शांत करती है।
टिप्स 10. भोजन में प्रतिदिन 20 से 30 प्रतिशत ताजा सब्जियों का प्रयोग करने से जीर्ण रोग ठीक होता है उम्र लंबी होती है शरीर स्वस्थ रहता है।
टिप्स 11. भिन्डी की सब्जी खाने से पेशाब की जलन दूर होती है तथा पेशाब साफ़ और खुलकर आता है।
टिप्स 12. दो तीन चम्मच नमक कढ़ाई में अच्छी तरह सेक कर गर्म नमक को मोटे कपडे की पोटली में बांधकर सिकाई करने से कमर दर्द में आराम मिलता है।
टिप्स 13. हरी मिर्च में एंटी आक्सिडेंट होता है जो की शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और कैंसर से लड़ने में मदद करता है इसमें विटामिन c प्रचुर मात्रा में होता है जो की प्राकृतिक प्रतिरक्षा में सुधार करता है।
टिप्स 14. मखाने को देसी घी में भून कर खाने से दस्तो में बहुत लाभ होता है इसके नियमित सेवन से रक्त चाप , कमर दर्द, तथा घुटने के दर्द में लाभ मिलता है।
टिप्स 15. अधिक गला ख़राब होने पर 5 अमरुद के पत्ते 1 गिलास पानी में उबाल कर थोड़ी देर आग पर पका ठंडा करके दिन में 4 से 5 बार गरारे करने से शीघ्र लाभ होता है।
टिप्स 16. आधा किलो अजवाइन को 4 लीटर पान में उबाले 2 लीटर पानी बचने पर छानकर रखे, इसे प्रतिदिन भोजन के पहले 1 कप पीने से लिवर ठीक रहता है एवं शराब पीने की इच्छा नहीं होती.।
टिप्स 17. नीम की पत्तियो को छाया में सुखा कर पीस लें, इस चूर्ण में बराबर मात्रा में कत्थे का चूर्ण मिला ले।इस चूर्ण को मुह के छालो पर लगाकर टपकाने से छाले ठीक होते है।
टिप्स 18. प्रतिदिन सेब का सेवन करने से ह्रदय,मस्तिस्क तथा आमाशय को समान रूप से शक्ति मिलती है तथा शरीर की कमजोरी दूर होती है।
टिप्स 19. 20से 25 किशमिश चीनी मिटटी के बर्तन में रात को भिगो कर रख दें।सुबह इन्हें खूब चबा कर खाने से लो ब्लड प्रेसर में लाभ मिलता है व शरीर पुष्ट होता है।
टिप्स 20. अमरुद में काफी पोषक तत्व होते है .इसके नियमित सेवन से कब्ज दूर होती है और मिर्गी, टाईफाइड , और पेट के कीड़े समाप्त होते है।

अंजनहारी (आँखों की सफ़ेद मुह वाली फुंसी) - लक्षण सावधानी और उपचार

अंजनहारी के कारण लक्षण और सावधानी एवं उपचार की जानकारी


अंजनहारी के बारे में आप ने बहुत सुना होगा ये एक तरह की सफ़ेद मुह वाली फुंसी होती है जो आँखों की पलकों पर भोंहों पर या उनके किनारे पर निकलती है और ये बड़ी कष्टदायक होती है फुंसी छोटी से होती है लेकिन दर्द बहुत ज्यादा होता है कभी तो यह फूट कर इसमें से मवाद बाहर निकल जाता है लेकिन वही पर दोबारा होने में समय नहीं लगाती
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अंजनहारी निकलने के कारण?
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- धूल के हानिकारक कणों का आँखों में जाना।
- गन्दिगी वाली जगह से मच्छर के द्वारा
- बाहर से आने पर बिना हाथ धोए आँखों को छूना।
- यदि पहले से किसी को अंजनहारी हो और उसके छूने या नज़ला जुकाम के संपर्क में आने से संक्रमण होता है ।
- आँखों की सफाई का ध्यान न रखना ।
- कई कई दिन तक ना नहाना
ये कुछ कारण है जिनसे इस तरह के रोग होते है
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अंजनहारी के उपचार
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- गर्मी के दिन में ये रोग ज्यादा होता है यदि सुबह और रात को सोने से पहले गुलाब जल की कुछ बूंदे डाली जाएँ तो ये रोग होने का खतरा कम होता है और यदि हो जाये तो जल्दी ठीक हो जाता है
- लौंग ( Cloves ) को पानी के साथ किसी सिलबट्टे पर रगड़ कर उसका लेप anjanhari पर करने से 1-2 दिन में ही ठीक हो जाती है
- काली मिर्च को पानी के साथ किसी सिलबट्टे पर रगड़ कर उसका लेप anjanhari पर करने से थोड़ी सी जलन होती है, लेकिन जल्दी ही अंजनहारी ठीक हो जाती है
- त्रिफला का जल सुबह खाली पेट लेने से anjanhari के इन्फेक्शन में राहत मिलती है
- रात को सोने से पहले 10-15 ग्राम त्रिफला का चूरण किसी कांच के गिलास में भे दें और सुबह उस पानी को छान कर उस पानी से आँखों को धोने से भी अंजनहारी ठीक होती है
- पीसे हुए चन्दन के चूरे को और उसमे 2-३ काली केसर की मिलाकर उसका लेप anjanhari पर लगाने से भी राहत मिलती है
- नीम को रात में पानी में उबाल कर सुबह उस नीम के ठडे पानी से आँखों को धोने से भी अंजनहारी में आराम मिलता है
- छुहारे के बीज को पानी के साथ घिस कर उसे दिन में २-३ बार anjanhari पर लगाने से लाभ होता है |
- हरड़ को पानी में घिसकर anjanhari पर लेप करने से लाभ होता है |
- तुलसी के रस में लौंग घिस लें और anjanhariपर यह लेप लगाने से आराम मिलता है |

अंजनहारी होने पर किन बातों का ध्यान रखना चाहिये ?


- अपना तौलिया, रूमाल आदि दूसरों के साथ शेयर न करें।
- जब भी अंजनहारी की दिक्कत हो तो आंखों को रगड़ना नहीं चाहिये इससे इन्फेक्शन होने और फैलने की सम्भावना रहती है
- किसी भी प्रकार का संक्रमण होने पर आंखों का मेकअप न करें।
- आंखों में यदि ज्यादा anjanhari के वजेह से सोजिश हो तो किताब पढ़ने, कम्प्यूटर पर घंटों काम करने से बचना चाहिये
- अंजनहारी निकलने पर मीठे फल (आम) और गरम तासीर की खाने की वस्तु से दूर रहना चाहिये

गिलोय का जानिये इसके अमृत जैसे गुण

अमृत कलश से छलकी बूंदो से पैदा हुयी थी गिलोय, जानिये इसके अमृत जैसे गुण


गिलोय की बेल पूरे भारत में पाई जाती है। इसकी आयु कई वर्षों की होती है। गिलोय का वैज्ञानिक नाम है–तिनोस्पोरा कार्डीफोलिया । इसे अंग्रेजी में गुलंच कहते हैं। कन्नड़ में अमरदवल्ली, गुजराती में गालो, मराठी में गुलबेल, तेलगू में गोधुची ,तिप्प्तिगा , फारसी में गिलाई,तमिल में शिन्दिल्कोदी आदि नामों से जाना जाता है। गिलोय में ग्लुकोसाइन, गिलो इन, गिलोइनिन, गिलोस्तेराल तथा बर्बेरिन नामक एल्केलाइड पाये जाते हैं। अगर आपके घर के आस-पास नीम का पेड़ हो तो आप वहां गिलोय बो सकते हैं ।
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नीम पर चढी हुई Giloy उसी का गुण अवशोषित कर लेती है ,इस कारण आयुर्वेद में वही गिलोय श्रेष्ठ मानी गई है जिसकी बेल नीम पर चढी हुई हो । मधुपर्णी, अमृता, तंत्रिका, कुण्डलिनी गुडूची आदि इसी के नाम हैं। गिलोय की बेल प्रायः कुण्डलाकार चढ़ती है। Giloy को अमृता भी कहा जाता है। यह स्वयं भी नहीं मरती है और उसे भी मरने से बचाती है, जो इसका प्रयोग करे। कहा जाता है की देव दानवों के युद्ध में अमृत कलश की बूँदें जहाँ जहाँ पडी, वहां वहां गिलोय उग गई।
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गिलोय खून की कमी दूर करें (To overcome the lack of blood)


गिलोय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और शरीर में खून की कमी को दूर करता है। इसके लिए प्रतिदिन सुबह-शाम गिलोय का रस घी या शहद मिलाकर सेवन करने से शरीर में खून की कमी दूर होती है।
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गिलोय पीलिया में फायदेमंद (Beneficial in jaundice)


गिलोय का सेवन पीलिया रोग में भी बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए गिलोय का एक चम्मच चूर्ण, काली मिर्च अथवा त्रिफला का एक चम्मच चूर्ण शहद में मिलाकर चाटने से पीलिया रोग में लाभ होता है। या गिलोय के पत्तों को पीसकर उसका रस निकाल लें। एक चम्‍मच रस को एक गिलास मट्ठे में मिलाकर सुबह-सुबह पीने से पीलिया ठीक हो जाता है।


जलन दूर करें


अगर आपके पैरों में जलन होती है और बहुत उपाय करने के बाद भी आपको कोई फायदा नहीं हो रहा है तो आप गिलोय का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए गिलोय के रस को नीम के पत्ते एवं आंवला के साथ मिलाकर काढ़ा बना लें। प्रतिदिन 2 से 3 बार इस काढ़े का सेवन करें इससे हाथ पैरों और शरीर की जलन दूर हो जाती है।

कान दर्द में लाभकारी (Ear pain beneficial)


गिलोय के पत्तों के रस को गुनगुना करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक होता है। साथ ही गिलोय को पानी में घिसकर और गुनगुना करके दोनों कानों में दिन में 2 बार डालने से कान का मैल निकल जाता है।


उल्टियां में फायदेमंद (Vomiting beneficial)


गर्मियों में कई लोगों को उल्‍टी की समस्‍या होती हैं। ऐसे लोगों के लिए भी गिलोय बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए गिलोय के रस में मिश्री या शहद मिलाकर दिन में दो बार पीने से गर्मी के कारण से आ रही उल्टी रूक जाती है।


पेट के रोगों में लाभकारी (Beneficial in diseases of the stomach)


गिलोय के रस या गिलोय के रस में शहद मिलाकर सेवन करने से पेट से संबंधित सभी रोग ठीक हो जाते है। इसके साथ ही आप गिलोय और शतावरी को साथ पीस कर एक गिलास पानी में मिलाकर पकाएं। जब उबाल कर काढ़ा आधा रह जाये तो इस काढ़े को सुबह-शाम पीयें।


खुजली दूर भगाएं


एलर्जी, कुष्ठ तथा सभी प्रकार त्वचा विकारों में भी गिलोय का प्रयोग लाभ पहुंचाता है। आंत्रशोथ तथा कृमि रोगों में भी गिलोय लाभकारी है। यह तीनों प्रकार के दोषों का नाश भी करती है। घी के साथ यह वातदोष, मिसरी के साथ पित्तदोष तथा शहद के साथ कफ दोष का निवारण करती है। हृदय की दुर्बलता, लो ब्लड प्रेशर तथा विभिन्न रक्त विकारों में यह फायदा पहुंचती है। खुजली अक्‍सर रक्त विकार के कारण होती है। गिलोय के रस पीने से रक्त विकार दूर होकर खुजली से छुटकारा मिलता है। इसके लिए गिलोय के पत्तों को हल्दी के साथ पीसकर खुजली वाले स्थान पर लगाइए या सुबह-शाम गिलोय का रस शहद के साथ मिलाकर पीएं।


आंखों के लिए फायदेमंद (Beneficial for the eyes)


गिलोय का रस आंवले के रस के साथ मिलाकर लेना आंखों के रोगों के लिए लाभकारी होता है। इसके सेवन से आंखों के रोगों तो दूर होते ही है, साथ ही आंखों की रोशनी भी बढ़ती हैं। इसके लिए गिलोय के रस में त्रिफला को मिलाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े में पीपल का चूर्ण और शहद मिलकर सुबह-शाम सेवन करें।


बुखार में फायदेमंद (Beneficial in fever)

पुराने बुखार या 6 दिन से भी ज्यादा समय से चले आ रहे बुखार के लिए गिलोय उत्तम औषधि है। इस प्रकार के बुखार के लिए लगभग 40 ग्राम गिलोय को कुचलकर मिट्टी के बर्तन में पानी मिलाकर रात भर ढक कर रख देते हैं। सुबह इसे मसल कर छानकर रोगी को दिया जाना चाहिए। इसकी अस्सी ग्राम मात्रा दिन में तीन बार पीने से जीर्ण ज्वर नष्ट हो जाता है।


ऐसा बुखार जिसके कारणों का पता नहीं चल पा रहा हो उसका उपचार भी गिलोय द्वारा संभव है। पुररीवर्त्तक ज्वर में गिलोय की चूर्ण तथा उल्टी के साथ ज्वर होने पर गिलोय का धनसत्व शहद के साथ रोगी को दिया जाना चाहिए। गिलोय एक रसायन है जो रक्तशोधक, ओजवर्धक, हृदयरोग नाशक ,शोधनाशक और लीवर टोनिक भी है। गिलोय के रस में शहद मिलाकर लेने से बार-बार होने वाला बुखार ठीक हो जाता है। या गिलोय के रस में पीपल का चूर्ण और शहद को मिलाकर लेने से तेज बुखार तथा खांसी ठीक हो जाती है। बुखार या लंबी बीमारी के बाद आई कमजोरी को दूर करने के लिए गिलोय के क्वाथ का प्रयोग किया जाना चाहिए। इसके लिए 100 ग्राम गिलोय को शहद के साथ पानी में पकाना चाहिए। सुबह−शाम इसकी 1−2 औंस मात्रा का सेवन करना चाहिए। इससे शरीर में शक्ति का संचार होता है।


मोटापा कम करें(Reduce Obesity)


गिलोय मोटापा कम करने में भी मदद करता है। मोटापा कम करने के लिए गिलोय और त्रिफला चूर्ण को सुबह और शाम शहद के साथ लें। या गिलोय, हरड़, बहेड़ा, और आंवला मिला कर काढ़ा बनाकर इसमें शिलाजीत मिलाकर पकाएं और सेवन करें। इस का नियमित सेवन से मोटापा रुक जाता है।


मलेरिया, टायफायड और टीबी में गुणकारी (Malaria , typhoid and TB healthy)


बार−बार होने वाला मलेरिया, कालाजार जैसे रोगों में भी यह बहुत उपयोगी है। मलेरिया में कुनैन के दुष्प्रभावों को यह रोकती है। टायफायड जैसे ज्वर में भी यह बुखार तो खत्म करती है रोगी की शारीरिक दुर्बलता भी दूर करती है। टीबी के कारक माइक्रोबैक्टीरियम ट्यूबरक्यूलम बैसीलस जीवाणु की वृद्धि को यह रोक देती है। यह रक्त मार्ग में पहुंच कर उस जीवाणु का नाश करती है और उसकी सिस्ट बनाने की प्रक्रिया को बाधित करती है। ऐस्केनिशिया कोलाइ नामक रोगाणु जिसका आक्रमण मुख्यतः मूत्रवाही संस्थान तथा आंतों पर होता है, को यह समूल नष्ट कर देती है।


मधुमेह में लाभकारी (Beneficial in diabetes)


ग्लूकोज टोलरेंस तथा एड्रीनेलिनजन्य हाइपर ग्लाइसीमिया के उपचार में भी गिलोय आश्चर्यजनक परिणाम देती है। इसके प्रयोग से रक्त में शर्करा का स्तर नीचे आता है। मधुमेह के दौरान होने वाले विभिन्न संक्रमणों के उपचार में भी गिलोय का प्रयोग किया जाता है।
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कैंसर में लाभकारी (Beneficial in Cancer)


कैंसर की बीमारी में 6 से 8 इंच की इसकी डंडी लें इसमें wheat grass का जूस और 5-7 पत्ते तुलसी के और 4-5 पत्ते नीम के डालकर सबको कूटकर काढ़ा बना लें।

युरिक एसिड को करें नियन्त्रित के उपाय

युरिक एसिड को करें नियन्त्रित इन उपायों के साथ, महत्तवपूर्ण जानकारी


यूरिक एसिड शरीर में प्यूरिन के टूटने से बनता है। प्यूरिन एक ऐसा पदार्थ है जो खाद्य पदार्थों में पाया जाता है और जिसका उत्पादन शरीर द्वारा स्वाभाविक रूप से होता है। यह ब्लड के माध्यम से बहता हुआ किडनी तक पहुंचता है। वैसे तो यूरिक एसिड यूरीन के माध्यम से शरीर के बाहर निकल जाता है। लेकिन, कभी-कभी यह शरीर में ही रह जाता है और इसकी मात्रा बढ़ने लगती है। यह परिस्थिति शरीर के लिए परेशानी का सबब बन सकती है। यूरिक एसिड की उच्च मात्रा के कारण गठिया जैसी समस्याएं पीड़ित हो सकते है। इसलिए यूरिक एसिड की मात्रा को नियंत्रित करना आवश्यक होता है। यूरिक एसिड को कुछ प्राकृतिक उपायों द्धारा कम किया जा सकता है
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सूजन को कम करें(Reduce inflammation) :- शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा कम करने के लिए आपको अपने आहार में बदलाव करना चाहिये। आपको अपने आहार में चेरी, ब्लूबेरी और स्ट्रॉबेरी को शामिल करें। यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड मेडिकल सेंटर में हुए शोध के अनुसार, सूजन कम करने में बैरीज आपकी मदद कर सकती है। यूरिक एसिड को कम करने में कुछ अन्य खाद्य पदार्थ भी मददगार होते हैं। जैसे अनानास में मौजूद पाचक एंजाइम ब्रोमेलाइन में एंटी इफ्लेमेंटरी तत्व होता है, जो सूजन को कम करते है


अजवाइन का सेवन (Intake of celery) :- अजवाइन यूरिक एसिड को कम करने के लिए एक और प्रभावी तरीका है क्योंकि यह प्राकृतिक मूत्रवर्धक है। यह रक्त में क्षार के स्तर को नियंत्रित कर सूजन को कम करने में मदद करती है।

ओमेगा-3 फैटी एसिड से बचें (Avoid omega- 3 fatty acids) :- ट्यूना, सामन, आदि मछलियों में ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में होता है। इसलिए यूरिक एसिड के बढ़ने पर इन्हें खाने से बचना चाहिए। साथ ही मछली में अधिक मात्रा में प्यूरिन पाया जाता है। प्यूरिन शरीर में ज्यादा यूरिक एसिड पैदा करता है


बेकिंग सोडा का सेवनएक गिलास पानी में आधा चम्मच बेकिंग सोडा मिला लें। इसे अच्छे से मिक्स करके नियमित रूप से इसके आठ गिलास पीये। यह बेकिंग सोडा का मिश्रण यूरिक एसिड क्रिस्टल भंग करने और यूरिक एसिड घुलनशीलता को बढ़ाने में मदद करता है। लेकिन सोडियम की अधिकता के कारण आपको बेकिंग सोडा लेते समय सावधानी बरतनी चाहिए। क्योंकि इससे आपका रक्तचाप बढ़ सकता है


प्यूरिन से भरपूर खाद्य पदार्थ से बचें (Avoid foods rich in purine) :- शरीर में यूरिक एसिड के स्तर को नियंत्रित करने के लिए प्यूरिन से भरपूर खाद्य पदार्थो के सेवन से बचना चाहिए। प्यूरिन एक प्राकृतिक पदार्थ है, जो शरीर को एनर्जी देता है। किडनी की समस्या होने पर प्यूरिन से भरपूर खाद्य पदार्थ शरीर के विभिन्न भागों में अत्यधिक यूरिक एसिड का संचय करते है। रेड मीट, समुद्री भोजन, ऑर्गन मीट और कुछ प्रकार के सेम सभी प्यूरिन से भरपूर होते हैं। परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट और सब्जियां जैसे शतावरी, मटर, मशरूम और गोभी से बचना चाहिए।

फ्रक्टोज से बचें (Avoid fructose) :- प्राकृतिक रूप से यूरिक एसिड को कम करने के लिए आपको फ्रक्टोज से भरपूर पेय का सेवन सीमित कर देना चाहिए। 2010 में किए गए एक शोध के अनुसार, जो लोग ज्यादा मात्रा में फ्रक्टोस वाले पेय का सेवन करते हैं उनमें गठिया होने का खतरा दोगुना अधिक होता है।

पीएच का संतुलन (PH Balance) :- शरीर में एसिड के उच्च स्तर को एसिडोसिस के रूप में जाना जाता है। यह शरीर के यूरिक एसिड के स्तर के साथ संबंधित होता है। अगर आपका पीएच स्तर 7 से नीचे चला जाता है, तो आपका शरीर अम्लीय हो जाता है। अपने शरीर क्षारीय को बनाये रखने के लिए, अपने आहार में सेब, सेब साइडर सिरका, चेरी का जूस, बेकिंग सोडा और नींबू को शामिल करें। साथ ही अपने नियमित में कम से कम 500 ग्राम विटामिन सी जरूर लें। विटामिन सी, यूरिक एसिड को यूरीन के रास्ते निकालकर इसे कम करने में सहायक होता है


खाना जैतून के तेल में पकाये (Food cooked in olive oil) :- यह तो सभी जानते है कि जैतून के तेल में बना आहार, शरीर के लिए लाभदायक होता है। इसमें विटामिन ई की भरपूर मात्रा में मौजूदगी खाने को पोषक तत्वों से भरपूर बनाता है और यूरिक एसिड को कम करता है।


वजन को नियंत्रित रखें (Keep weight control) :- मोटे लोग प्यूरिन युक्त आहार बहुत अधिक मात्रा में लेते हैं। और प्यूरिन से भरपूर खाद्य पदार्थ यूरिक एसिड के स्तर को बढ़ा देते है। लेकिन, साथ ही यह तेजी से वजन कम होने का एक कारक भी है। इसलिए आपको सभी मामलों में क्रैश डाइटिंग से बचना चाहिए। अगर आप मोटापे से ग्रस्त हैं, तो यूरिक एसिड के स्तर को बढ़ने से रोकने के लिए अपने वजन को नियंत्रित करें


शराब का कम मात्रा में सेवन (Alcohol consumed in moderation) :- शराब आपके शरीर को डिहाइड्रेट कर देता है, इसलिए प्यूरिन से उच्च खाद्य पदार्थों के शराब की बड़ी मात्रा को लेने से बचना चाहिए। बीयर में यीस्ट भरपूर होता है, इसलिए इसके सेवन से दूर रहना चाहिये।

इमली और इमली के बीज - जानिये इनके लाभ


ईमली (Imli/Tamarind) खाने से शरीर में कई रोग उत्पन्न हो सकते हैं लेकिन पुरानी ईमली (Imli/Tamarind) कई बीमारियों में बेहतरीन औषधि का काम करती है| ईमली (Imli/Tamarind) का फल कच्चा हरा, पकने के बाद लाल रंग का हो जाता है। पकी ईमली (Imli/Tamarind) का स्वाद खट्टा-मीठा होता है। इसे खाने के बाद दांत तक खट्टे होने लगते हैं। एक ईमली (Imli/Tamarind) के फल में तीन से लेकर दस बीज निकलते हैं। ये बीज काले, चमकदार व बहुत कड़े होते हैं।
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भारत में सभी गांवों में खूब ऊंचे, हरे-भरे फली से लदे झाड़ नजर आते है, जो 70-80 फुट तक ऊंचे रहते हैं। चारों ओर इसकी टहनियां होती है। इसके पत्ते हरे, छोटे और संयुक्त प्रकार के होते हैं। ये पत्ते खाने में खट्टे होते हैं। इसके पत्ते और फूल एक ही समय में आते हैं, इनसे झाड़ों की रौनक और भी बढ़ जाती है। इसकी झाड़ लंबी अवधि का दीर्घायु होती है। इसके सभी भागों का औषधि के रूप में उपयोग होता है। पकी ईमली (Imli/Tamarind) का प्रयोग खट्टी सब्जी के लिये करते है। Imli Chutney भी बनाते हैं। इससे सब्जी स्वादिष्ट बन जाती है।
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ईमली (Imli/Tamarind) में साईट्रिक एसीड ,टार्टरिक एसीड ,पोटाशियम बाई टार्टरेट.फास्फोरिक एसीड ,इनोसिटोल आदि तत्व पाए जाते हैं| इन तत्वों की मौजूदगी से ईमली (Imli/Tamarind) हमारी त्वचा और गुणसूत्रों को सीधे प्रभावित करती है| गर्मियों में ईमली (Imli/Tamarind) के नियमित सेवन करने से लू नहीं लगती है| ईमली (Imli/Tamarind) का पेय लेने से मितली,चक्कर आना जैसी समस्याएं नहीं होती हैं| ईमली (Imli/Tamarind) के औषधीय गुणों से ज्यादा लोग परिचित नहीं हैं। ईमली (Imli/Tamarind) का वानस्पतिक नाम टैमेरिन्डस इंडिका है।आदिवासी हर्बल जानकार ईमली (Imli/Tamarind) को अनेक हर्बल नुस्खों के तौर पर अपनाते हैं। चलिए आज जानते हैं ईमली (Imli/Tamarind) से जुड़े कुछ अजब-गजब हर्बल नुस्खों के बारे में जिन्हें शायद कम लोग ही जानते हैं।

1- कुछ लोगों को पेट में अफारा की शिकायत हो जाती हैं. अफारा की शिकायत पेट में कब्ज के कारण ही होती हैं. इसे ठीक करने के लिए आप ईमली (Imli/Tamarind) के गूदे का प्रयोग कर सकते हैं. पेट के अफारा को दूर करने के लिए ईमली (Imli/Tamarind) के गूदे को पानी में डाल लें. अब इस पानी को कुछ देर तक उबाल लें. जब पानी उबलने लग जाए तो इसमें 2 या 3 चम्मच चीनी डाल लें. अब पानी को थोडा ठंडा कर लें. और इसका सेवन करें. इस पानी का सेवन करने से पेट के अफारा की शिकायत के साथ – साथ आपके पेट की कब्ज भी दूर हो जाएगी.
2- पीलिया के रोग के होने पर ईमली (Imli/Tamarind) के पानी का प्रयोग आप कर सकते हैं. ईमली (Imli/Tamarind) के पानी का प्रयोग पीलिया के रोग होने पर करने से इस रोग में फायदा होता हैं पीलिया के रोग से मुक्ति पाने के लिए रोजाना एक गिलास ईमली (Imli/Tamarind) का पानी पियें. ईमली (Imli/Tamarind) के पानी का प्रयोग करने से पीलिया की बीमारी तो ठीक होती ही हैं. इसके साथ – साथ अगर किसी व्यक्ति को फोड़े या फुंसी हो गये हैं तो वो भी ठीक हो जाती हैं.
3- रक्तातिसार की शिकायत को दूर करने के लिए इमली के बीजों के चुर्ण का प्रयोग किया जा सकता हैं. इसके लिए इमली के बीजों को अच्छी तरह से पीस लें. अब एक गिलास लस्सी लें और उसके साथ एक चम्मच चुर्ण को फांक लें. रक्तातिसार में लाभ होगा.
4- अगर किसी व्यक्ति को फोड़े और सूजन हो गई हैं तो फोडे को और फोड़े की सूजन के लिए इमली के बीजों का उपयोग करना बहुत ही लाभदायक होता हैं. इसके लिए इमली के बीजों को पानी में डालकर उबाल लें. बीजों को उबालने के बाद अच्छी तरह से पीसकर फोड़े पर इसका लेप करें. फुंसी व सूजन में राहत मिलेगी.
5- शीघ्रपतन के रोग को दूर करने के लिए इमली के बीजों का प्रयोग करना बहुत ही उपयोगी होता हैं. शिघ्रपतन की बीमारी को ठीक करने के लिए 700 ग्राम बीजों को तोड़कर पानी में भिगो दें. 5 या 6 दिनों तक बीजों को पानी में ही रहने दें तथा जब तक ये बीज अची तरह से फूल न जाये तब तक इन बीजों का पानी रोजाना बदलें. जब बीजों के छिलके हटने लग जाये तो बीजों के छिलकों को हटा कर पानी को छाया में सुखा दें. बीजों को सुखाने के बाद बीजों को अच्छी तरह से पीस लें. अब बीजों के चुर्ण में चुर्ण की बराबर मात्रा में मिश्री को डालकर मिला लें. अब रोजाना एक चम्मच चुर्ण का सेवन एक गिलास गरम दूध के साथ करें. शीघ्रपतन की समस्या से राहत मिलेगी.
6- आँखों में जलन, आँखों का लाल हो जाना तथा आँखों के दुखने की समस्या से राहत पाने के लिए ईमली (Imli/Tamarind) के पत्तों तथा अरंड के पत्तों का प्रयोग किया जा सकता हैं. इसके लिए ईमली (Imli/Tamarind) के पत्तें लें और उन्हें अरंड के पत्तों में बांध लें. अब इन पत्तों को हल्की आंच पर सेकें. सेकने के बाद इन पत्तियों का रस निकाल लें. अब एक फिटकरी लें और उसे भी भुन लें. अब पत्तियों के रस में भुनी हुई फिटकरी को और थोड़ी अफीम को मिलाकर एक तांबे के बर्तन में घोट लें. घोटने के बाद एक साफ कपड़ा लें और उसे रस में डूबा कर आँखों पर रखें. आँखों की सारी परेशानियाँ जल्द ही दूर हो जाएगी.
7- पेट की बदहजमी को दूर करने के लिए भी आप ईमली (Imli/Tamarind) का प्रयोग कर सकते हैं. पेट की बदहजमी को दूर करने के लिए आप इमली के पना का प्रयोग कर सकते हैं. अगर आपके पेट में बदहजमी हो गई हैं तो उससे छुटकारा पाने के लिए आप इमली के पना का सेवन प्रतिदिन करें. आपके पेट की बदहजमी खत्म हो जाएगी.
8- हैजा की बीमारी में ईमली (Imli/Tamarind) से बनी गोलियों का उपयोग करने से लाभ होता हैं. इन गोलियों को बनाना बहुत ही सरल हैं. गोलियों को बनाने के लिए इमली लें और लहसुन की 6 या 7 कली लें. थोडा छाज लें और उसमे ईमली (Imli/Tamarind) और लहसुन को मसलकर छोटी – छोटी गोलियां बना लें. रोजाना एक गोली का सेवन प्याज के रस के साथ करने से हैजा की बीमारी में लाभ होगा. प्याज के रस का और गोली का सेवन प्रत्येक 20 मिनट बाद करें.
9- गले में टोंसिल की बीमारी होने पर भी आप ईमली (Imli/Tamarind) का प्रयोग कर सकते हैं. ईमली (Imli/Tamarind) के बीजों का प्रयोग करने से टोंसिल की बिमारी जल्दी ही ठीक हो जाती हैं. टोंसिल की बिमारी से राहत पाने के लिए इमली के बीजों को पानी में घीस लें. टोंसिल की बीमारी में ख़ासी से व्यक्ति बहुत ही परेशान हो जाते हैं. अगर आपको टोंसिल की बीमारी के दौरान बार – बार खांसी हो रही हो तो आप ईमली (Imli/Tamarind) के बीजों को पानी में घिसकर इमली के बीजों का लेप बना लें और इस लेप को अपने तालू पर लगाये. आपको टोंसिल की बिमारी से तथा ख़ासी से जल्द ही छुटकारा मिल जायेगा.
10- वमन के रोग से पीड़ित व्यक्ति को काफी परेशानी होती हैं. इस बीमारी में वमन से पीड़ित व्यक्ति को बार – बार बिना कुछ खाए भी उल्टी होती रहती हैं. जिसका प्रभाव पीड़ित व्यक्ति के स्वास्थ्य पर पड़ता हैं और वह बहुत ही कमजोर हो जाता हैं. वमन की बिमारी के दौरान अगर आपको बार – बार उल्टियां हो रही हो तो आप ईमली (Imli/Tamarind) के शर्बत का सेवन कर सकते हैं. उल्टी से राहत पाने के लिए आप इमली के द्वारा ही एक और उपाय कर सकते हैं. इस उपाए को अपनाने के लिए ईमली (Imli/Tamarind) के छिलके को जलाकर 10 ग्राम चुर्ण तैयारे कर लें. अब एक गिलास पानी के साथ इस चुर्ण को फांक लें. इमली के छिलकों के चुर्ण का सेवन करने से आपको उल्टियों से राहत मिलेगी.
11- शराब व भांग के नशे को उतारने के लिए भी ईमली (Imli/Tamarind) का प्रयोग किया जा सकता हैं. शराब और भांग के नशे को कम करने के लिए आप इमली के शर्बत का या केवल इमली का प्रयोग कर सकते हैं. इमली का शर्बत पीने से तथा इमली को चूसने से शराब और भांग के नशे का प्रभाव कम हो जाता हैं.
12- ईमली (Imli/Tamarind) के गूदे का पानी पीने से वमन, पीलिया, प्लेग, गर्मी के ज्वर में भी लाभ होता है ।
13- ह्रदय की दाहकता या जलन को शान्त करने के लिये पकी हुई इमली के रस (गूदे मिले जल) में मिश्री मिलाकर पिलानी चाहियें ।
14- लू-लगना : पकी हुई इमली के गूदे को हाथ और पैरों के तलओं पर मलने से लू का प्रभाव समाप्त हो जाता है । यदि इस गूदे का गाढ़ा धोल बालों से रहित सर पर लगा दें तो लू के प्रभाव से उत्पन्न बेहोसी दूर हो जाती है
15- खांसी : टी.बी. या क्षय की खांसी हो (जब कफ़ थोड़ा रक्त आता हो) तब इमली के बीजों को तवे पर सेंक, ऊपर से छिलके निकाल कर कपड़े से छानकर चूर्ण रख ले। इसे ३ ग्राम तक घृत या मधु के साथ दिन में ३-४ बार चाटने से शीघ्र ही खांसी का वेग कम होने लगता है । कफ़ सरलता से निकालने लगता है और रक्तश्राव व् पीला कफ़ गिरना भी समाप्त हो जाता है ।
16- ह्रदय में जलन : पकी ईमली (Imli/Tamarind) का रस मिश्री के साथ पिलाने से ह्रदय में जलन कम हो जाती है ।
17- नेत्रों में गुहेरी होना : ईमली (Imli/Tamarind) के बीजों की गिरी पत्थर पर घिसें और इसे गुहेरी पर लगाने से तत्काल ठण्डक पहुँचती है ।
18- चर्मरोग : लगभग ३० ग्राम ईमली (Imli/Tamarind) (गूदे सहित) को १ गिलाश पानी में मथकर पीयें तो इससे घाव, फोड़े-फुंसी में लाभ होगा ।
19- उल्टी होने पर पकी इमली को पाने में भिगोयें और इस इमली के रस को पिलाने से उल्टी आनी बंद हो जाती है ।
20- खूनी बवासीर : इमली के पत्तों का रस निकालकर रोगी को सेवन कराने से रक्तार्श में लाभ होता है ।
21- बहुमूत्र या महिलाओं का सोमरोग : ईमली (Imli/Tamarind) का गूदा ५ ग्राम रात को थोड़े जल में भिगो दे, दूसरे दिन प्रातः उसके छिलके निकालकर दूध के साथ पीसकर और छानकर रोगी को पिला दे । इससे स्त्री और पुरुष दोनों को लाभ होता है । मूत्र- धारण की शक्ति क्षीण हो गयी हो या मूत्र अधिक बनता हो या मूत्रविकार के कारण शरीर क्षीण होकर हड्डियाँ निकल आयी हो तो इसके प्रयोग से लाभ होगा ।
22- अण्डकोशों में जल भरना : लगभग ३० ग्राम इमली की ताजा पत्तियाँ को गौमूत्र में औटाये । एकबार मूत्र जल जाने पर पुनः गौमूत्र डालकर पकायें । इसके बाद गरम – गरम पत्तियों को निकालकर किसी अन्डी या बड़े पत्ते पर रखकर सुहाता- सुहाता अंडकोष पर बाँध कपड़े की पट्टी और ऊपर से लगोंट कास दे । सारा पानी निकल जायेगा और अंडकोष पूर्ववत मुलायम हो जायेगें ।
23- भूख लगती है – पके हुए ईमली (Imli/Tamarind) के फलों को पानी के साथ मसलकर रस तैयार किया जाता है और हल्की सी मात्रा में काला नमक डालकर सेवन किया जाए तो भूख लगने लगती है। प्रतिदिन दो बार ऐसा करने से भूख ना लगने की शिकायत दूर हो जाती है।
24- बुखार ठीक होता है – पके हुए ईमली (Imli/Tamarind) के फलों के रस की करीब 15 ग्राम मात्रा बुखार से ग्रसित रोगी को दी जाए, तो बुखार उतर जाता है। डांग गुजरात के आदिवासी मानते हैं कि इस रस के साथ इलायची और कुछ मात्रा में खजूर भी मिला दिया जाए, तो ज्यादा फायदा होता है।
25- सूजन में आराम – ईमली (Imli/Tamarind) की पत्तियों को पानी के साथ कुचलकर लेप तैयार किया जाए और जोड़ दर्द वाले हिस्सों या सूजन वाले अंगों पर लेपित करके सूती कपड़े से बांधकर रखा जाए, तो दर्द और सूजन में तेजी से आराम मिलता है।
26- गले की खराश दूर – पत्तियों को कुचलकर रस तैयार करके कुल्ला किया जाए तो गले की खराश दूर हो जाती है। पकी हुई ईमली (Imli/Tamarind) के फलों का रस भी कुल्ला किया जाए. तो समस्या में आराम मिलता है।
27- दस्त में आराम – ईमली (Imli/Tamarind) के बीजों को भूनकर पीस लिया जाए और इसकी 3 ग्राम मात्रा को गुनगुने पानी के साथ देने से दस्त में आराम मिलता है।
28- घाव जल्दी सूखता है – पातालकोट में आदिवासी ईमली (Imli/Tamarind) की पत्तियों को कुचलकर रस को घाव पर लगाते हैं। माना जाता है कि पत्तियां घाव को अतिशीघ्र सुखाने में मदद करती हैं।
29- शुक्राणुओं की मात्रा बढ़ती है – डांग- गुजरात के आदिवासी अजवायन, ईमली (Imli/Tamarind) के बीज और गुड़ की समान मात्रा लेकर घी में अच्छी तरह भून लेते हैं और फिर इसकी कुछ मात्रा प्रतिदिन नपुंसकता से ग्रसित व्यक्ति को देते हैं। इन आदिवासियों के अनुसार ये मिश्रण पौरुषत्व बढ़ाने के साथ-साथ शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने में भी मदद करता है।
30- दांतों का पीलापन :- ईमली (Imli/Tamarind) के बीजों को पीस केर उसका चूरण बना लें और सुबह और शाम को उससे दांत साफ़ करे आप के दांत चमक उठेंगे !

आथ्रराइटिस के दर्द में क्या खाना और क्या नही खाना

आथ्रराइटिस के दर्द में क्या खाना चाहिये और क्या नही खाना चाहिये, बहुत सुन्दर जानकारी


अर्थराइटिस के दर्द को बढ़ाने वाले आहार

अर्थराइटिस की चपेट में आज हर उम्र के लोग आ रहे हैं खास कर युवा अर्थराइटिस यानि गठिया या जोड़ो की बीमारी है। जब आपको चलने – फिरने में तकलीफ होने लगे, सो कर उठने पर या सीढियाँ चढ़ने पर जोड़ों में दर्द हो, तो एक ही बीमारी का अंदेशा होता है वह है अर्थराइिटस। यह बीमारी पहले 50 साल से अधिक उम्र के लोगों को अधिक होती थी लेकिन बदलती जीवन शैली के कारण उम्र का कोई बंधन नहीं रहा । अर्थराइटिस के दर्द को बढ़ाने या इस बीमारी में आहार का बहुत योगदान है हम आज आपको ऐसे ही कुछ खाद्य पदार्थ के बारे में बता रहे हैं जिनकी वजह से अर्थराइटिस का दर्द बढ़ता है और कम होता है ।
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- मीठा खाद्य-पदार्थ का सेवन अधिक करना :-यदि आप अपने दैनिक जीवन में मीठा ज्यादा खाते हैं तो मीठा आपके शरीर में प्रोटीन्‍स का ह्रास करता है। जिस कारण आपके शरीर में गठिया का दर्द बढ़ने लगता है। इसलिए आपको अपने डाइट चार्ट में से शुगर और शुगर वाले आहार को निकाल दीजिए। यह आपके शरीर में अर्थराइटिस की बीमारी को कम नहीं होने देगा


- ढूध वाले खाद्य पदार्थ :-ढूध से बने खाद्य-पदार्थ भी अर्थराइटिस की बीमारी को बढ़ा सकते हैं। क्‍योंकि ढूध वाले उत्‍पाद जैसे, पनीर, मखन आदि में कुछ प्रोटीन होते हैं जो जोड़ों के पास मौजूद ऊतकों को प्रभावित करते हैं, जिसकी वजह से जोड़ों का दर्द बढ़ जाता है। इसलिए ढूध वाले पदार्थ को खाने से बचना चाहिये ।

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- सॉफ्ट ड्रिंक और अल्कोहल (शराब) :- अर्थराइटिस के मरीजों को शराब और साफ्ट ड्रिंक आदि के सेवन से बचना चाहिए। अल्कोहल शरीर में यूरिक एसिड को बढ़ाता है और तो और शरीर में से गैर जरूरी तत्व भी शरीर में से नहीं निकलने देता । इसी तरह सॉफ्ट ड्रिंक खासकर मीठे पेय या फ्रूट जूस पैकिंग वाले खाद्य-पदार्थ में फ्रेक्टोस नामक तत्व होता है, जो हमारे शरीर में यूरिक एसिड को बढ़ाने में मदद करता है। 2015 में एक शोध से यह बात साबित हुई थी कि जिन लोगों के खाद्य-पदार्थ में फ्रक्टोस वाली चीजों का सेवन अधिक होता है उनमें अर्थराइटिस होने का खतरा दो से तीन गुना तक अधिक हो जाता है।

- टमाटर खाने से बचें :- टमाटर को विटामिन और मिनरल का स्त्रोत माना जाता है और ये शरीर को फायदा भी पहुंचाता है लेकिन यह अर्थराइटिस के दर्द को बढ़ाता भी है। टमाटर में कुछ ऐसे रासायनिक तत्व पाये जाते हैं जो जोड़ों में सूजन बढ़ाकर दर्द पैदा करते हैं। इसलिए टमाटर खाने से बचना चाहिये ।
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अर्थराइटिस के दर्द से मुक्ति देने वाले खाद्य पदार्थ
- कद्दू जरुर खाएं -कद्दू में काफी मात्रा में कैरोटीन होता है जो जोड़ों के सूजन को काफी हद तक कम करता है।


- ग्रीन टी: दिन में एक बार ग्रीन टी का सेवन जरुर करें क्योंकि इसमें एंटीऑक्‍सीडेंट होता है जो दर्द का पता ही नहीं चलने देता उसे वहीँ दबा देता है। जरुर पढ़ें :- एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidants) शरीर को निरोगी बनाता है )


- Vitamin C: अपने दैनिक जीवन के भोजन में विटामिन सी वाले खाद्य पदार्थ जरुर लें विटामिन सी वाले खाद्य पदार्थ में स्‍वास्‍थ्‍य वर्धक कोलाजिन होता है। जो हड्डियां को मजबूत बनाता हैं।

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- प्‍याज : प्‍याज में एसपिरिन के मुकाबले का पदर्थ होता हा जो दर्द में राहत देता है


- हल्‍दी : हल्‍दी का सेवन करने से जोड़ों के दर्द और सूजन में कमी आती है (जरुर पढ़ें :- हल्दी (Turmeric) के औषधीय एवं आयुर्वेदिक गुण)


- लहसुन को अपने भोजन में जरुर शामिल करें ये खून को साफ़ करता है. अर्थराइटिस के कारण खून में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है. लहसुन के रस से यूरिक एसिड पिघल कर तरल रूप में पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाता है.
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ध्यान दें :- नाश्ता अच्छा करें। फल, ओटमील खाएँ और सारे दिन में 8-10 गिलास पानी पीएँ। जहाँ तक मुमकिन हो कैफीन, शराब और नशीले पदार्थों के सेवन से बचें।

फलों को खाने के कुछ नियम


फलों को खाने के भी कुछ नियम होते हैं, आप भी जानकारी बढ़ाइये





फल हमारे स्वास्थ्य कितने लाभकारी है आप इस बात से अंदाज़ा लगा सकते हैं की जब भी हम बीमार पड़ते हैं तो डॉक्टर हमें खाने के लिए फल ही बोलता है और यदि हम अपने धर्म में झांक कर देखें तो देवताओं का भोजन भी फल हैं फल अपने आप में सम्पूर्ण भोजन है लेकिन हम लोग अभी तक फल को अपने दैनिक जीवन में वो स्थान नहीं दे पायें जो उन्हें मिलना चाहिये
फल को कब और कैसे खाना है यह भी बहुत कम लोग जानते हैं और अधिकतर लोग फलों को भोजन के बाद स्थान देते हैं जो की सरासर गलत है फल को खाने के भी कुछ नियम है तभी उनके गुण हम प्राप्त कर सकते हैं वरना वो शरीर और स्वास्थ्य को लाभ पहुँचाने की स्थान पर नुक्सान ही पहुंचाएंगे
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फल का असमय सेवन करने के नुक्सान
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आपने नोट किया होगा की कभी कभी फल खाने के बाद तबियत ख़राब हो जाती है या कुछ लोगों को तो य वहम भी है की में ये फल खाया था तो में बीमार हो गया ऐसा सिर्फ फलों को खाने के बारे में जानकारी न होने की वजह से है हमे फल क्यों खाने चाहिये ? फल किस के साथ खाने चाहिये ? कब खाने चाहिये ? आज हम आपको इनसब बातों के बारे में जानकारी देंगे हर फल खाने के कुछ नियम है और हम जैसे जैसे इन नियमों का पालन करेंगे तो हम इनसे शक्ति मिलने के साथ अच्छा स्वास्थ्य भी मिलेगा
अक्सर बहुत से लोगों की शिकायत होती है की जैसे ही मैंने केला खाया तो मुझे पाखाने की इच्छा होती है या हज़म नहीं होता सारा दिन छाती भारी सी रहती है या जब भी मैं तरबूज खाता हूँ तो डकारें आती रहती हैं ये सब फल के रस का भोजन के संपर्क में आने की वजह से होता है बहुत से लोगों को तो फल खाने के बाद गैस और पेट फूलने जैसे शिकायत भी होती है इन सबकी जड़ असमय खाया जाने वाला फल है यदि आप किसी भी फल को खली पेट लेंगे तो इस तरह की दिक्कत का सामना नहीं करना पडेगा
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खाली पेट फल खाने के फायदे
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फल को खाने का सही समय है खाली पेट या सुबह का समय यदि आप फलों को खली पेट खाते हैं तो यह आपके पाचन तंत्र के विष को बाहर निकलने में मदद करेगा और आपको शक्ति भी मिलेगी सह्रेर की फालतू चर्बी घटेगी और उर्जा का संचार होगा जो लोग किसी भी समय फल खाते हैं या भोजन करने के बाद फल का सेवन करते हैं वेह फल उनके पेट में जा कर सड़ता है सड़ने पर जो खमीर बनता है तो उसमे फल भी जा कर सड़ने लगते हैं और तेजाब बनाते हैं यदि हमारे पेट में फल किसी भी अन्न के संपर्क में आ जाते हैं तो वेह पाचन रसों के साथ मिलकर सारे भोजन को ख़राब कर देते हैं यही कारण है की फल को हमेशा खली पेट खाना चाहिये
आप फलों को खाली पेट खाना शुरू करें तो आप देखेंगे की आपके बाल यदि सफेद है तो वो सफ़ेद होना रुक जायेंगे और काले होने शुरु हो जायेंगे , गंजापन नहीं रहेगा , सिरदर्द जैसी शिकायत अपने आप ख़तम हो जाएँगी उसके लिया आपको कुछ दिन फलाहार पर ही रहना चाहिये कम से कम तीन दिन . यदि आप तीन दिन सिर्फ फल खा कर रह लेते हैं तो आपके शरीर की सफाई तो होगी ही साथ ही यदि आँखों के निचे काले घेरे है तो वो भी ख़तम हो जायेंगे और आपकी सुन्दरता में निखार आयेगा
मैंने अपने पिछले लेखों में भी बताया था की कोशिश करें की सप्ताह में 1 दिन सिर्फ फलाहार करें या महीने में 1 सप्ताह फल खाएं यदि आप इस तरह के नियम नहीं कर सकते तो सुबह नाश्ते में सिर्फ फल लें आपको कभी भी डॉक्टर की जरुरत महसूस नहीं होगी
जरुर पढ़े :- बालों का गिरना, गंजापन के आयुर्वेदिक व प्राकृतिक उपाय
अब बात करते हैं फलों के रस यानि फ्रूट जूस की तो में तो हमेशा से एक समय में एक ही तरह का फल खाने की सलाह देता हूँ लेकिन यदि आप फल खाने की स्थति में नहीं हैं तो आपको ताज़े फलों का जूस लेना चाहिये बिना किसी भी तरह का नमक या बर्फ या मीठा डाले और हमेशा जूस को घूट घूट कर पीना चाहिये ताकि आपके मुह की लार उसमे अच्छी तरह मिक्स हो जाये . डिब्बा बंद जूस कभी भी नहीं पीना चाहिये न ही जूस को कभी गरम करना चाहिये
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कुछ फलों के गुण :-
- हर रोज़ सुबह खली पेट एक सेब खाने से आप डाक्टर से हमेशा दूर रहेंगे। सेब खाएं और स्वस्थ रहें। हर रोज़ एक सेब खाने से हृदय रोग व कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है।
- संतरा हर रोज़ खली पेट खाने से एक दवाई की तरह काम करता है इससे शरीर में कोलेस्ट्रोल कम होता है, गुर्दे यदि पथरी हो तो उसे गला कर पेशाब के रास्ते बाहर निकाल देता है आयुर्वेद के अनुसार कुछ फल जैसे संतरा, नींबू आदि अम्लीय हैं पर हमारे शरीर में जाकर सब क्षारीय में परिवर्तित हो जाते हैं।
- तरबूज ठंडा होने के कारण शरीर में ठंडक तो देता ही है साथ ही शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है क्योंकि इसमे 92% पानी होता है। तरबूज खाने के बाद कम से कम 2 घंटे तक पानी नहीं पीना चाहिये
- अमरूद और पपीता को शरीर के अंदर की सफाई में प्रयोग होने वाली झाड़ू की संज्ञा दी गयी है क्योंकि यह शरीर की सफाई करते हैं इनमें विटामिन- सी सबसे अधिक होता है। पपीता आंखों के लिए भी बहुत लाभदायक है और अमरूद के बीज और रेशे बहुत होते हैं जिससे कब्ज नहीं रहती ।
- कीवी फल छोटा है पर इसमें पोटाशियम (Potassium), मेग्नीशियम (Magnesium) विटामिन ई (Vitamin E ) और रेशे बहुत मात्रा में होते हैं
आप फल खाने की विधि जान चुके हैं और यदि आप इसे अपना लेते है तो आप सुंदर, दीर्घायु, स्वस्थ शरीर संपन्न , शक्ति संपन्न कहलायेंगे कोशिश करें अपने साथ साथ अपने मित्रों और सगे सम्बन्धियों के साथ भी इस जानकारी को शेयर जरुर करें.

दिमाग को तेज बनाती हैं ये चीजें

दिमाग को तेज बनाती हैं ये चीजें, बच्चों-बड़ों सभी के लिये लाभकारी


ब्रेन फूड उन लोगों के लिए जो अक्सर छोटी-छोटी बातें भूल जाते हैं। और जब याद आती है तो लगता है मुझसे ये गलती कैसे हो गयी । आज हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ खास ब्रेन फूड। जिन्हें खाने से अल्जाइमर (Alzheimer’s) रोग नहीं होता है। साथ ही, दिमाग की पावर (Brain Power) भी बढ़ता है।
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टमाटर (Tomatoes)- खट्टा-मीठा टमाटर खाने के जायके को तो बढ़ाता ही है। इसमे प्रोटीन (Protein), विटामिन(Vitamin) , वसा (Fat) आदि तत्व पाए जाते हैं। इसमें कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates) की मात्रा कम होती है। टमाटर में लाइकोपिन (Lycopene) होता है। यह शरीर की फ्री रैडिकल्स (Free radicals) से रक्षा करता है। साथ ही, यह ब्रेन फूड ब्रेन की सेल्स (Brain Cell) को डैमेज (Damage) होने से भी बचाता है।
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अखरोट (Walnut) – रोज अखरोट खाने से पोषक तत्वों (Nutrients) की कमी दूर हो जाती है। साथ ही, सेहत से जुड़ी कई समस्याएं भी खत्म होती है। अखरोट में ओमेगा 3 (Omega-3), फैटी एसिड (Fatty acid) , प्रोटीन (Protein), फाइबर (Fiber) और एंटीआक्सीडेंट (Antioxidant) अच्छी मात्रा में पाए जाते हैंं। थोड़ी अखरोट रोज खाने से याददाश्त बढ़ती है।
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स्ट्रॉबेरी (Strawberry) – स्ट्रॉबेरी अपनी मनमोहक सुगंध और स्वाद के कारण पूरी दुनिया में बहुत लोकप्रिय है। इसका नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है। स्ट्रॉबेरी मिल्क शेक (Strawberry Milkshakes) , आइसक्रीम (Ice-cream) आदि का स्वाद भी बढ़ाती है। इस ब्रेन फूड में भरपूर मात्रा में एंटीआक्सीडेंट (Antioxidant) पाए जाते हैं, जो मेमोरी लॉस (Memory Loss) से बचाने का काम करते हैं।
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जैतून (Olives) – जैतून का तेल केवल आपके स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि चेहरे की खूबसूरती के लिए भी लाभदायक है। जैतून में अच्छी मात्रा में फैट (Fat) पाया जाता है। इसीलिए यह ब्रेन फूड याददाश्त (Memory) बढ़ाने का काम भी करता है।
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दही (Curd) – दही में प्रोटीन (Protein) , कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates), वसा (Fat) , खनिज (Mineral) , लवण (Salt) , कैल्शियम (Calcium) और फॉस्फोरस (Phosphorus) पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। दही का नियमित सेवन करने से कई लाभ होते हैं। यह शरीर में लाभदायी जीवाणुओं (Beneficial bacteria) की बढ़ोत्तरी करता है और हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है। इसमें अमीनो एसिड (Amino acid) पाया जाता है, जिससे दिमागी तनाव (Brain Strain) दूर होता है और मेमोरी पावर बढ़ता है।
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जायफल (Nutmeg) – जायफल को अपने विशेष स्वाद और सुगंध के लिए जाना जाता है। इसमें ऐसे तत्व होते हैं, जो दिमाग को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। साथ ही, याददाश्त को बेहतर बनाते हैं।
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तुलसी (Basil) – तुलसी को हिंदू धर्म में देवी का रूप माना गया है। इसका उपयोग मसाले के रूप में भी किया जाता है। यह कई बीमारियों में औषधि का काम करती है। रोजाना तुलसी के 2-4 पत्ते खाने से बार-बार भूलने की बीमारी (Alzheimer’s) दूर हो जाती है।
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अलसी (Linseed) – अलसी के बीज में बहुत सारा प्रोटीन (Protein)और फाइबर (Fiber) होता है। इन्हें खाने से दिमाग तेज होता है।
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चाय (Tea) – चाय में पाया जाने वाला पॉलीफिनॉल (Polifenol) दिमाग को संतुलित रखने में मदद करता है। यह दिमाग को शांत और एकाग्र भी बनाता है। ग्रीन टी (Green Tea) भी गुणों से भरपूर है। इसमें बहुत अधिक मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) पाए जाते हैं। इसीलिए इसके नियमित सेवन से शरीर स्वस्थ रहता है। दिन भर में दो से तीन कप ग्रीन टी पीने से याददाश्त बढ़ती है।
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केसर (Saffron) – केसर एक ऐसा ब्रेन फूड है जो खाने के स्वाद को दोगुणा कर देता है। केसर का उपयोग अनिद्रा (Insomnia) दूर करने वाली दवाओं में किया जाता है। इसके सेवन से मस्तिष्क ऊर्जावान (Energetic) रहता है।
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हल्दी (Turmeric) – हल्दी दिमाग के लिए एक अच्छा ब्रेन फूड है। यह सिर्फ खाने के स्वाद और रंग में ही इजाफा नहीं करती है, बल्कि दिमाग को भी स्वस्थ रखती है। इसके नियमित सेवन से अल्जाइमर रोग (Alzheimer’s disease) नहीं होता है। साथ ही, यह दिमाग की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को रिपेयर (Repair damaged brain cells) का भी काम करती है।
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दालचीनी (Cinnamon) – अल्जाइमर (Alzheimer’s) रोगियों के लिए दालचीनी एक जबरदस्त दवा है। दालचीनी के नियमित सेवन से याददाश्त बढ़ती है और दिमाग स्वस्थ (Healthy mind) रहता है।
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अजवाइन की पत्तियां (Celery leaves) – यदि आप अपने खाने को अलग फ्लेवर देना चाहते हैं तो अजवाइन की पत्तियों का उपयोग करें। अजवाइन की पत्तियां शरीर को स्वस्थ और जवान बनाए रखने में मदद करती हैं। दरअसल, अजवाइन की पत्तियों में पर्याप्त मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट ((Antioxidant)) पाए जाते हैं। इसीलिए यह दिमाग के लिए औषधि की तरह काम करती हैं। यही कारण है कि अरोमा थेरेपी (Aroma therapy) में भी इसका उपयोग किया जाता है।
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कालीमिर्च (Black pepper) – कालीमिर्च में पेपरिन (Peprin) नाम का रसायन पाया जाता है। यह रसायन शरीर और दिमाग की कोशिकाओं को रिलैक्स (Relax) करता है। डिप्रेशन (depression) में यह रसायन जादू-सा काम करता है। इसीलिए यदि आप अपने दिमाग को स्वस्थ बनाए रखना चाहते हैं तो खाने में काली मिर्च का उपयोग करें।